5 सितंबर 2028 को इम्फाल का पंचांग

मंगलवार, 5 सितंबर 2028, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 5 सितंबर 2028 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (07:44 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (12:53 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 04:56 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 14:20 से 15:54 तक है।

दिन और रात
दिन 04:56 – 17:28
रात 04:57 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 12:53 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 07:44 तक
कृष्ण द्वितीया 10:09, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 15:49, 6 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 03:12, 6 सित॰ तक
गंडअशुभ 04:04, 7 सित॰ तक
करण
कौलव 07:44 तक
तैतिल 20:57 तक
गर 10:09, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:08 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:56
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
17:58
चंद्रास्त
05:49
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:25 – 04:10
अभिजीत मुहूर्त
10:47 – 11:37

अशुभ समय

राहुकाल
14:20 – 15:54
यमगंड
08:04 – 09:38
गुलिक काल
11:12 – 12:46

5 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग04:56 – 06:30टालें
उद्वेग06:30 – 08:04टालें
चर08:04 – 09:38सामान्य
लाभ09:38 – 11:12शुभ
अमृत11:12 – 12:46शुभ
काल12:46 – 14:20टालें
शुभ14:20 – 15:54शुभ
रोग15:54 – 17:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:28 – 18:54टालें
लाभ18:54 – 20:20शुभ
उद्वेग20:20 – 21:46टालें
शुभ21:46 – 23:12शुभ
अमृत23:12 – 00:38शुभ
चर00:38 – 02:04सामान्य
रोग02:04 – 03:31टालें
काल03:31 – 04:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल04:5605:59दिन
सूर्य05:5907:02दिन
शुक्र07:0208:04दिन
बुध08:0409:07दिन
चंद्र09:0710:09दिन
शनि10:0911:12दिन
गुरु11:1212:15दिन
मंगल12:1513:17दिन
सूर्य13:1714:20दिन
शुक्र14:2015:23दिन
बुध15:2316:25दिन
चंद्र16:2517:28दिन
शनि17:2818:25रात
गुरु18:2519:23रात
मंगल19:2320:20रात
सूर्य20:2021:18रात
शुक्र21:1822:15रात
बुध22:1523:12रात
चंद्र23:1200:10रात
शनि00:1001:07रात
गुरु01:0702:04रात
मंगल02:0403:02रात
सूर्य03:0203:59रात
शुक्र03:5904:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2577° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।