18 सितंबर 2028 को इम्फाल का पंचांग

सोमवार, 18 सितंबर 2028, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 18 सितंबर 2028 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (23:53 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (15:23 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:01 पर और सूर्यास्त 17:14 पर है। राहुकाल 06:33 से 08:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:01 – 17:14
रात 05:01 तक
तिथि
अमावस्या, 23:53 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 15:23 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 23:53 तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:00, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 12:17, 19 सित॰ तक
योग
साध्य 07:53 तक
शुभ 03:32, 19 सित॰ तक
शुक्ल 23:13, 19 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 13:51 तक
नाग 23:53 तक
किंस्तुघ्न 09:56, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 20:36 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:01
सूर्यास्त
17:14
चंद्रोदय
04:14
चंद्रास्त
16:43
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:27 – 04:14
अभिजीत मुहूर्त
10:43 – 11:32

अशुभ समय

राहुकाल
06:33 – 08:04
यमगंड
09:36 – 11:08
गुलिक काल
12:39 – 14:11

18 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:01 – 06:33शुभ
काल06:33 – 08:04टालें
शुभ08:04 – 09:36शुभ
रोग09:36 – 11:08टालें
उद्वेग11:08 – 12:39टालें
चर12:39 – 14:11सामान्य
लाभ14:11 – 15:43शुभ
अमृत15:43 – 17:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:14 – 18:43सामान्य
रोग18:43 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:39टालें
लाभ21:39 – 23:08शुभ
उद्वेग23:08 – 00:36टालें
शुभ00:36 – 02:05शुभ
अमृत02:05 – 03:33शुभ
चर03:33 – 05:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:0106:02दिन
शनि06:0207:03दिन
गुरु07:0308:04दिन
मंगल08:0409:05दिन
सूर्य09:0510:06दिन
शुक्र10:0611:08दिन
बुध11:0812:09दिन
चंद्र12:0913:10दिन
शनि13:1014:11दिन
गुरु14:1115:12दिन
मंगल15:1216:13दिन
सूर्य16:1317:14दिन
शुक्र17:1418:13रात
बुध18:1319:12रात
चंद्र19:1220:11रात
शनि20:1121:10रात
गुरु21:1022:09रात
मंगल22:0923:08रात
सूर्य23:0800:07रात
शुक्र00:0701:06रात
बुध01:0602:05रात
चंद्र02:0503:03रात
शनि03:0304:02रात
गुरु04:0205:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2582° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।