7 मई 2025 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 7 मई 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 7 मई 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (10:20 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (18:17 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 12:23 से 14:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 19:02
रात 05:43 तक
तिथि
दशमी, 10:20 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 18:17 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 मई 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 10:20 तक
शुक्ल एकादशी 12:29, 8 मई तक
नक्षत्र
योग
व्याघातअशुभ 01:04, 8 मई तक
हर्षण 01:56, 9 मई तक
करण
गर 10:20 तक
वणिज 23:22 तक
विष्टि (भद्रा) 12:29, 8 मई तक
चंद्र राशि
सिंह 00:57, 8 मई तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
14:36
चंद्रास्त
02:41
दिनमान
13h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:23 – 14:03
यमगंड
07:23 – 09:03
गुलिक काल
10:43 – 12:23

7 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:44 – 07:23शुभ
अमृत07:23 – 09:03शुभ
काल09:03 – 10:43टालें
शुभ10:43 – 12:23शुभ
रोग12:23 – 14:03टालें
उद्वेग14:03 – 15:43टालें
चर15:43 – 17:23सामान्य
लाभ17:23 – 19:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:02 – 20:23टालें
शुभ20:23 – 21:43शुभ
अमृत21:43 – 23:03शुभ
चर23:03 – 00:23सामान्य
रोग00:23 – 01:43टालें
काल01:43 – 03:03टालें
लाभ03:03 – 04:23शुभ
उद्वेग04:23 – 05:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4406:50दिन
चंद्र06:5007:57दिन
शनि07:5709:03दिन
गुरु09:0310:10दिन
मंगल10:1011:16दिन
सूर्य11:1612:23दिन
शुक्र12:2313:30दिन
बुध13:3014:36दिन
चंद्र14:3615:43दिन
शनि15:4316:49दिन
गुरु16:4917:56दिन
मंगल17:5619:02दिन
सूर्य19:0219:56रात
शुक्र19:5620:49रात
बुध20:4921:43रात
चंद्र21:4322:36रात
शनि22:3623:29रात
गुरु23:2900:23रात
मंगल00:2301:16रात
सूर्य01:1602:09रात
शुक्र02:0903:03रात
बुध03:0303:56रात
चंद्र03:5604:50रात
शनि04:5005:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2111° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।