12 अगस्त 2029 को जयपुर का पंचांग

रविवार, 12 अगस्त 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 12 अगस्त 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (23:54 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (15:00 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 17:27 से 19:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 19:06
रात 05:57 तक
तिथि
तृतीया, 23:54 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 15:00 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अगस्त 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 23:54 तक
शुक्ल चतुर्थी 21:05, 13 अग॰ तक
नक्षत्र
योग
शिव 21:41 तक
सिद्ध 18:19, 13 अग॰ तक
करण
तैतिल 13:17 तक
गर 23:54 तक
वणिज 10:29, 13 अग॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 20:31 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
08:06
चंद्रास्त
20:26
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:58

अशुभ समय

राहुकाल
17:27 – 19:06
यमगंड
12:31 – 14:10
गुलिक काल
15:49 – 17:27

12 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:56 – 07:35टालें
चर07:35 – 09:14सामान्य
लाभ09:14 – 10:53शुभ
अमृत10:53 – 12:31शुभ
काल12:31 – 14:10टालें
शुभ14:10 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:27टालें
उद्वेग17:27 – 19:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:06 – 20:27शुभ
अमृत20:27 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:31टालें
काल00:31 – 01:53टालें
लाभ01:53 – 03:14शुभ
उद्वेग03:14 – 04:36टालें
शुभ04:36 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5607:02दिन
शुक्र07:0208:08दिन
बुध08:0809:14दिन
चंद्र09:1410:20दिन
शनि10:2011:25दिन
गुरु11:2512:31दिन
मंगल12:3113:37दिन
सूर्य13:3714:43दिन
शुक्र14:4315:49दिन
बुध15:4916:54दिन
चंद्र16:5418:00दिन
शनि18:0019:06दिन
गुरु19:0620:00रात
मंगल20:0020:54रात
सूर्य20:5421:49रात
शुक्र21:4922:43रात
बुध22:4323:37रात
चंद्र23:3700:31रात
शनि00:3101:26रात
गुरु01:2602:20रात
मंगल02:2003:14रात
सूर्य03:1404:08रात
शुक्र04:0805:03रात
बुध05:0305:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2707° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।