3 जनवरी 2030 को जयपुर का पंचांग

गुरुवार, 3 जनवरी 2030, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 जनवरी 2030 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (10:50 तक), नक्षत्र मूल (22:01 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:16 पर और सूर्यास्त 17:46 पर है। राहुकाल 13:50 से 15:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:16 – 17:46
रात 07:16 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:50 तक
अमावस्या
नक्षत्र
मूल, 22:01 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जनवरी 2030 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 10:50 तक
अमावस्या 08:19, 4 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 22:01 तक
पूर्वाषाढ़ा 20:23, 4 जन॰ तक
योग
वृद्धि 13:09 तक
ध्रुव 09:53, 4 जन॰ तक
करण
शकुनि 10:50 तक
चतुष्पद 21:32 तक
नाग 08:19, 4 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:16
सूर्यास्त
17:46
चंद्रोदय
06:18
चंद्रास्त
17:04
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:28 – 06:22
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
13:50 – 15:08
यमगंड
07:16 – 08:35
गुलिक काल
09:53 – 11:12

3 जनवरी 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:16 – 08:35शुभ
रोग08:35 – 09:53टालें
उद्वेग09:53 – 11:12टालें
चर11:12 – 12:31सामान्य
लाभ12:31 – 13:50शुभ
अमृत13:50 – 15:08शुभ
काल15:08 – 16:27टालें
शुभ16:27 – 17:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:46 – 19:27शुभ
चर19:27 – 21:08सामान्य
रोग21:08 – 22:50टालें
काल22:50 – 00:31टालें
लाभ00:31 – 02:12शुभ
उद्वेग02:12 – 03:53टालें
शुभ03:53 – 05:35शुभ
अमृत05:35 – 07:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1608:08दिन
मंगल08:0809:01दिन
सूर्य09:0109:53दिन
शुक्र09:5310:46दिन
बुध10:4611:38दिन
चंद्र11:3812:31दिन
शनि12:3113:23दिन
गुरु13:2314:16दिन
मंगल14:1615:08दिन
सूर्य15:0816:01दिन
शुक्र16:0116:53दिन
बुध16:5317:46दिन
चंद्र17:4618:53रात
शनि18:5320:01रात
गुरु20:0121:08रात
मंगल21:0822:16रात
सूर्य22:1623:23रात
शुक्र23:2300:31रात
बुध00:3101:38रात
चंद्र01:3802:46रात
शनि02:4603:53रात
गुरु03:5305:01रात
मंगल05:0106:09रात
सूर्य06:0907:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2762° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।