18 जनवरी 2025 को जम्मू का पंचांग

शनिवार, 18 जनवरी 2025, जम्मू, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 18 जनवरी 2025 को जम्मू में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (07:31, 19 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (14:51 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:32 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 10:06 से 11:23 तक है।

दिन और रात
दिन 07:32 – 17:50
रात 07:31 तक
तिथि
पंचमी, 07:31 तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 14:51 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जनवरी 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:31, 19 जन॰ तक
कृष्ण षष्ठी 09:59, 20 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
शोभन 01:15, 19 जन॰ तक
अतिगंडअशुभ 01:57, 20 जन॰ तक
करण
कौलव 18:26 तक
तैतिल 07:31, 19 जन॰ तक
गर 20:42, 19 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 21:28 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:32
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
22:11
चंद्रास्त
10:11
दिनमान
10h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:42 – 06:37
अभिजीत मुहूर्त
12:20 – 13:01

अशुभ समय

राहुकाल
10:06 – 11:23
यमगंड
13:58 – 15:15
गुलिक काल
07:32 – 08:49

18 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:32 – 08:49टालें
शुभ08:49 – 10:06शुभ
रोग10:06 – 11:23टालें
उद्वेग11:23 – 12:41टालें
चर12:41 – 13:58सामान्य
लाभ13:58 – 15:15शुभ
अमृत15:15 – 16:32शुभ
काल16:32 – 17:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:50 – 19:32शुभ
उद्वेग19:32 – 21:15टालें
शुभ21:15 – 22:58शुभ
अमृत22:58 – 00:40शुभ
चर00:40 – 02:23सामान्य
रोग02:23 – 04:06टालें
काल04:06 – 05:49टालें
लाभ05:49 – 07:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:3208:23दिन
गुरु08:2309:15दिन
मंगल09:1510:06दिन
सूर्य10:0610:58दिन
शुक्र10:5811:49दिन
बुध11:4912:41दिन
चंद्र12:4113:32दिन
शनि13:3214:24दिन
गुरु14:2415:15दिन
मंगल15:1516:07दिन
सूर्य16:0716:58दिन
शुक्र16:5817:50दिन
बुध17:5018:58रात
चंद्र18:5820:06रात
शनि20:0621:15रात
गुरु21:1522:23रात
मंगल22:2323:32रात
सूर्य23:3200:40रात
शुक्र00:4001:49रात
बुध01:4902:57रात
चंद्र02:5704:06रात
शनि04:0605:14रात
गुरु05:1406:23रात
मंगल06:2307:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां जम्मू में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2070° (लाहिड़ी)। समय जम्मू (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।