28 मार्च 2025 को जूनागढ़ का पंचांग

शुक्रवार, 28 मार्च 2025, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (19:55 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (22:09 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 11:21 से 12:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 19:01
रात 06:43 तक
तिथि
चतुर्दशी, 19:55 तक
अमावस्या
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 22:09 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 मार्च 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:55 तक
अमावस्या 16:27, 29 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 19:26, 29 मार्च तक
योग
शुक्ल 02:06, 29 मार्च तक
ब्रह्म 22:03, 29 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:32 तक
शकुनि 19:55 तक
चतुष्पद 06:13, 29 मार्च तक
नाग 16:27, 29 मार्च तक
चंद्र राशि
कुंभ 16:47 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
05:50
चंद्रास्त
18:01
दिनमान
12h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:17

अशुभ समय

राहुकाल
11:21 – 12:53
यमगंड
15:57 – 17:29
गुलिक काल
08:17 – 09:49

28 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:44 – 08:17सामान्य
लाभ08:17 – 09:49शुभ
अमृत09:49 – 11:21शुभ
काल11:21 – 12:53टालें
शुभ12:53 – 14:25शुभ
रोग14:25 – 15:57टालें
उद्वेग15:57 – 17:29टालें
चर17:29 – 19:01सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:01 – 20:29टालें
काल20:29 – 21:57टालें
लाभ21:57 – 23:25शुभ
उद्वेग23:25 – 00:52टालें
शुभ00:52 – 02:20शुभ
अमृत02:20 – 03:48शुभ
चर03:48 – 05:16सामान्य
रोग05:16 – 06:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4407:46दिन
बुध07:4608:47दिन
चंद्र08:4709:49दिन
शनि09:4910:50दिन
गुरु10:5011:51दिन
मंगल11:5112:53दिन
सूर्य12:5313:54दिन
शुक्र13:5414:56दिन
बुध14:5615:57दिन
चंद्र15:5716:58दिन
शनि16:5818:00दिन
गुरु18:0019:01दिन
मंगल19:0120:00रात
सूर्य20:0020:58रात
शुक्र20:5821:57रात
बुध21:5722:55रात
चंद्र22:5523:54रात
शनि23:5400:52रात
गुरु00:5201:51रात
मंगल01:5102:49रात
सूर्य02:4903:48रात
शुक्र03:4804:46रात
बुध04:4605:45रात
चंद्र05:4506:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2096° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।