31 दिसंबर 2028 को जूनागढ़ का पंचांग

रविवार, 31 दिसंबर 2028, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 31 दिसंबर 2028 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (22:18 तक), नक्षत्र आर्द्रा (04:50, 1 जन॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:25 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 16:55 से 18:16 तक है।

दिन और रात
दिन 07:25 – 18:16
रात 07:26 तक
तिथि
पूर्णिमा, 22:18 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आर्द्रा, 04:50 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 22:18 तक
कृष्ण प्रतिपदा 20:53, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 04:50, 1 जन॰ तक
पुनर्वसु 03:57, 2 जन॰ तक
योग
ब्रह्म 23:34 तक
इंद्र 21:12, 1 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:50 तक
बव 22:18 तक
बालव 09:39, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:25
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
18:02
चंद्रास्त
06:57
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:40 – 06:33
अभिजीत मुहूर्त
12:29 – 13:13

अशुभ समय

राहुकाल
16:55 – 18:16
यमगंड
12:51 – 14:12
गुलिक काल
15:34 – 16:55

31 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:25 – 08:47टालें
चर08:47 – 10:08सामान्य
लाभ10:08 – 11:29शुभ
अमृत11:29 – 12:51शुभ
काल12:51 – 14:12टालें
शुभ14:12 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 16:55टालें
उद्वेग16:55 – 18:16टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:16 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:34शुभ
चर21:34 – 23:12सामान्य
रोग23:12 – 00:51टालें
काल00:51 – 02:30टालें
लाभ02:30 – 04:08शुभ
उद्वेग04:08 – 05:47टालें
शुभ05:47 – 07:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:2508:20दिन
शुक्र08:2009:14दिन
बुध09:1410:08दिन
चंद्र10:0811:02दिन
शनि11:0211:57दिन
गुरु11:5712:51दिन
मंगल12:5113:45दिन
सूर्य13:4514:39दिन
शुक्र14:3915:34दिन
बुध15:3416:28दिन
चंद्र16:2817:22दिन
शनि17:2218:16दिन
गुरु18:1619:22रात
मंगल19:2220:28रात
सूर्य20:2821:34रात
शुक्र21:3422:39रात
बुध22:3923:45रात
चंद्र23:4500:51रात
शनि00:5101:57रात
गुरु01:5703:03रात
मंगल03:0304:08रात
सूर्य04:0805:14रात
शुक्र05:1406:20रात
बुध06:2007:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2622° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।