14 नवंबर 2026 को कोल्हापुर का पंचांग

शनिवार, 14 नवंबर 2026, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 14 नवंबर 2026 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (23:24 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (20:24 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:36 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 09:26 से 10:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:36 – 17:58
रात 06:36 तक
तिथि
पंचमी, 23:24 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 20:24 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 23:24 तक
शुक्ल षष्ठी 02:01, 16 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 23:29, 15 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 06:22, 15 नव॰ तक
गंडअशुभ 07:16, 16 नव॰ तक
करण
बव 10:03 तक
बालव 23:24 तक
कौलव 12:44, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 03:11, 15 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
10:45
चंद्रास्त
22:01
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
09:26 – 10:52
यमगंड
13:42 – 15:07
गुलिक काल
06:36 – 08:01

14 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:36 – 08:01टालें
शुभ08:01 – 09:26शुभ
रोग09:26 – 10:52टालें
उद्वेग10:52 – 12:17टालें
चर12:17 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:07शुभ
अमृत15:07 – 16:33शुभ
काल16:33 – 17:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:58 – 19:33शुभ
उद्वेग19:33 – 21:08टालें
शुभ21:08 – 22:42शुभ
अमृत22:42 – 00:17शुभ
चर00:17 – 01:52सामान्य
रोग01:52 – 03:27टालें
काल03:27 – 05:02टालें
लाभ05:02 – 06:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3607:33दिन
गुरु07:3308:30दिन
मंगल08:3009:26दिन
सूर्य09:2610:23दिन
शुक्र10:2311:20दिन
बुध11:2012:17दिन
चंद्र12:1713:14दिन
शनि13:1414:11दिन
गुरु14:1115:07दिन
मंगल15:0716:04दिन
सूर्य16:0417:01दिन
शुक्र17:0117:58दिन
बुध17:5819:01रात
चंद्र19:0120:04रात
शनि20:0421:08रात
गुरु21:0822:11रात
मंगल22:1123:14रात
सूर्य23:1400:17रात
शुक्र00:1701:20रात
बुध01:2002:24रात
चंद्र02:2403:27रात
शनि03:2704:30रात
गुरु04:3005:33रात
मंगल05:3306:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2324° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।