19 दिसंबर 2026 को कोल्हापुर का पंचांग

शनिवार, 19 दिसंबर 2026, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 19 दिसंबर 2026 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (22:09 तक), नक्षत्र रेवती (15:58 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 09:42 से 11:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 18:04
रात 06:56 तक
तिथि
दशमी, 22:09 तक
एकादशी
नक्षत्र
रेवती, 15:58 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल दशमी 22:09 तक
शुक्ल एकादशी 20:15, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 15:58 तक
अश्विनी 14:55, 20 दिस॰ तक
योग
वरीयान 10:35 तक
परिघअशुभ 08:10, 20 दिस॰ तक
करण
तैतिल 10:48 तक
गर 22:09 तक
वणिज 09:18, 20 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मीन 15:58 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
13:44
चंद्रास्त
01:48
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
09:42 – 11:06
यमगंड
13:53 – 15:17
गुलिक काल
06:55 – 08:19

19 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:55 – 08:19टालें
शुभ08:19 – 09:42शुभ
रोग09:42 – 11:06टालें
उद्वेग11:06 – 12:30टालें
चर12:30 – 13:53सामान्य
लाभ13:53 – 15:17शुभ
अमृत15:17 – 16:40शुभ
काल16:40 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:04 – 19:40शुभ
उद्वेग19:40 – 21:17टालें
शुभ21:17 – 22:53शुभ
अमृत22:53 – 00:30शुभ
चर00:30 – 02:06सामान्य
रोग02:06 – 03:43टालें
काल03:43 – 05:19टालें
लाभ05:19 – 06:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5507:51दिन
गुरु07:5108:47दिन
मंगल08:4709:42दिन
सूर्य09:4210:38दिन
शुक्र10:3811:34दिन
बुध11:3412:30दिन
चंद्र12:3013:25दिन
शनि13:2514:21दिन
गुरु14:2115:17दिन
मंगल15:1716:12दिन
सूर्य16:1217:08दिन
शुक्र17:0818:04दिन
बुध18:0419:08रात
चंद्र19:0820:12रात
शनि20:1221:17रात
गुरु21:1722:21रात
मंगल22:2123:25रात
सूर्य23:2500:30रात
शुक्र00:3001:34रात
बुध01:3402:39रात
चंद्र02:3903:43रात
शनि03:4304:47रात
गुरु04:4705:52रात
मंगल05:5206:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2337° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।