28 सितंबर 2027 को कोल्हापुर का पंचांग

मंगलवार, 28 सितंबर 2027, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 28 सितंबर 2027 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:55 तक), नक्षत्र मघा (08:20 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 15:24 से 16:54 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 18:24
रात 06:22 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:55 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 06:06 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:55 तक
कृष्ण चतुर्दशी 10:55, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:06, 29 सित॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 04:00, 30 सित॰ तक
योग
साध्य 07:32 तक
शुभ 03:56, 29 सित॰ तक
शुक्ल 00:26, 30 सित॰ तक
करण
वणिज 13:55 तक
विष्टि (भद्रा) 00:24, 29 सित॰ तक
शकुनि 10:55, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
04:23
चंद्रास्त
17:02
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:34
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
15:24 – 16:54
यमगंड
09:23 – 10:53
गुलिक काल
12:23 – 13:54

28 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:22 – 07:52टालें
उद्वेग07:52 – 09:23टालें
चर09:23 – 10:53सामान्य
लाभ10:53 – 12:23शुभ
अमृत12:23 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:24टालें
शुभ15:24 – 16:54शुभ
रोग16:54 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:24 – 19:54टालें
लाभ19:54 – 21:24शुभ
उद्वेग21:24 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:23शुभ
अमृत00:23 – 01:53शुभ
चर01:53 – 03:23सामान्य
रोग03:23 – 04:53टालें
काल04:53 – 06:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2207:22दिन
सूर्य07:2208:23दिन
शुक्र08:2309:23दिन
बुध09:2310:23दिन
चंद्र10:2311:23दिन
शनि11:2312:23दिन
गुरु12:2313:23दिन
मंगल13:2314:24दिन
सूर्य14:2415:24दिन
शुक्र15:2416:24दिन
बुध16:2417:24दिन
चंद्र17:2418:24दिन
शनि18:2419:24रात
गुरु19:2420:24रात
मंगल20:2421:24रात
सूर्य21:2422:24रात
शुक्र22:2423:23रात
बुध23:2300:23रात
चंद्र00:2301:23रात
शनि01:2302:23रात
गुरु02:2303:23रात
मंगल03:2304:23रात
सूर्य04:2305:23रात
शुक्र05:2306:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।