15 जनवरी 2028 को कोल्हापुर का पंचांग

शनिवार, 15 जनवरी 2028, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 जनवरी 2028 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (20:10 तक), नक्षत्र मघा (11:25 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 09:53 से 11:17 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 18:19
रात 07:05 तक
तिथि
चतुर्थी, 20:10 तक
पंचमी
नक्षत्र
मघा, 11:25 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जनवरी 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 20:10 तक
कृष्ण पंचमी 17:27, 16 जन॰ तक
नक्षत्र
मघा 11:25 तक
योग
सौभाग्य 02:10, 16 जन॰ तक
शोभन 22:48, 16 जन॰ तक
करण
बव 09:41 तक
बालव 20:10 तक
कौलव 06:45, 16 जन॰ तक
तैतिल 17:27, 16 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
21:46
चंद्रास्त
09:31
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
09:53 – 11:17
यमगंड
14:06 – 15:30
गुलिक काल
07:05 – 08:29

15 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:05 – 08:29टालें
शुभ08:29 – 09:53शुभ
रोग09:53 – 11:17टालें
उद्वेग11:17 – 12:42टालें
चर12:42 – 14:06सामान्य
लाभ14:06 – 15:30शुभ
अमृत15:30 – 16:55शुभ
काल16:55 – 18:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:19 – 19:55शुभ
उद्वेग19:55 – 21:30टालें
शुभ21:30 – 23:06शुभ
अमृत23:06 – 00:42शुभ
चर00:42 – 02:18सामान्य
रोग02:18 – 03:53टालें
काल03:53 – 05:29टालें
लाभ05:29 – 07:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0508:01दिन
गुरु08:0108:57दिन
मंगल08:5709:53दिन
सूर्य09:5310:49दिन
शुक्र10:4911:46दिन
बुध11:4612:42दिन
चंद्र12:4213:38दिन
शनि13:3814:34दिन
गुरु14:3415:30दिन
मंगल15:3016:27दिन
सूर्य16:2717:23दिन
शुक्र17:2318:19दिन
बुध18:1919:23रात
चंद्र19:2320:27रात
शनि20:2721:30रात
गुरु21:3022:34रात
मंगल22:3423:38रात
सूर्य23:3800:42रात
शुक्र00:4201:46रात
बुध01:4602:49रात
चंद्र02:4903:53रात
शनि03:5304:57रात
गुरु04:5706:01रात
मंगल06:0107:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2487° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।