21 फ़रवरी 2028 को कोल्हापुर का पंचांग

सोमवार, 21 फ़रवरी 2028, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 फ़रवरी 2028 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (08:08, 22 फ़र॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (19:53 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 18:37
रात 06:55 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 19:53 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:08, 22 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 22:51, 22 फ़र॰ तक
योग
सिद्धि 17:00 तक
व्यतीपातअशुभ 17:49, 22 फ़र॰ तक
करण
कौलव 18:55 तक
तैतिल 08:08, 22 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
धनु 02:36, 22 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
04:00
चंद्रास्त
15:21
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:51
यमगंड
11:19 – 12:46
गुलिक काल
14:14 – 15:42

21 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:56 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:51टालें
शुभ09:51 – 11:19शुभ
रोग11:19 – 12:46टालें
उद्वेग12:46 – 14:14टालें
चर14:14 – 15:42सामान्य
लाभ15:42 – 17:09शुभ
अमृत17:09 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:37 – 20:09सामान्य
रोग20:09 – 21:41टालें
काल21:41 – 23:14टालें
लाभ23:14 – 00:46शुभ
उद्वेग00:46 – 02:18टालें
शुभ02:18 – 03:51शुभ
अमृत03:51 – 05:23शुभ
चर05:23 – 06:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5607:54दिन
शनि07:5408:53दिन
गुरु08:5309:51दिन
मंगल09:5110:49दिन
सूर्य10:4911:48दिन
शुक्र11:4812:46दिन
बुध12:4613:45दिन
चंद्र13:4514:43दिन
शनि14:4315:42दिन
गुरु15:4216:40दिन
मंगल16:4017:38दिन
सूर्य17:3818:37दिन
शुक्र18:3719:38रात
बुध19:3820:40रात
चंद्र20:4021:41रात
शनि21:4122:43रात
गुरु22:4323:45रात
मंगल23:4500:46रात
सूर्य00:4601:48रात
शुक्र01:4802:49रात
बुध02:4903:51रात
चंद्र03:5104:52रात
शनि04:5205:54रात
गुरु05:5406:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2501° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।