17 फ़रवरी 2029 को कोल्हापुर का पंचांग

शनिवार, 17 फ़रवरी 2029, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2029 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (00:49, 18 फ़र॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (11:41 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:58 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 09:52 से 11:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:58 – 18:36
रात 06:57 तक
तिथि
चतुर्थी, 00:49 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 11:41 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 00:49, 18 फ़र॰ तक
शुक्ल पंचमी 03:23, 19 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 14:42, 18 फ़र॰ तक
योग
साध्य 15:33 तक
शुभ 16:26, 18 फ़र॰ तक
करण
वणिज 11:32 तक
विष्टि (भद्रा) 00:49, 18 फ़र॰ तक
बव 14:06, 18 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:58
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
09:00
चंद्रास्त
21:44
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
09:52 – 11:19
यमगंड
14:14 – 15:41
गुलिक काल
06:58 – 08:25

17 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:58 – 08:25टालें
शुभ08:25 – 09:52शुभ
रोग09:52 – 11:19टालें
उद्वेग11:19 – 12:47टालें
चर12:47 – 14:14सामान्य
लाभ14:14 – 15:41शुभ
अमृत15:41 – 17:08शुभ
काल17:08 – 18:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:36 – 20:08शुभ
उद्वेग20:08 – 21:41टालें
शुभ21:41 – 23:14शुभ
अमृत23:14 – 00:46शुभ
चर00:46 – 02:19सामान्य
रोग02:19 – 03:52टालें
काल03:52 – 05:24टालें
लाभ05:24 – 06:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5807:56दिन
गुरु07:5608:54दिन
मंगल08:5409:52दिन
सूर्य09:5210:50दिन
शुक्र10:5011:48दिन
बुध11:4812:47दिन
चंद्र12:4713:45दिन
शनि13:4514:43दिन
गुरु14:4315:41दिन
मंगल15:4116:39दिन
सूर्य16:3917:38दिन
शुक्र17:3818:36दिन
बुध18:3619:38रात
चंद्र19:3820:39रात
शनि20:3921:41रात
गुरु21:4122:43रात
मंगल22:4323:45रात
सूर्य23:4500:46रात
शुक्र00:4601:48रात
बुध01:4802:50रात
चंद्र02:5003:52रात
शनि03:5204:53रात
गुरु04:5305:55रात
मंगल05:5506:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2640° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।