25 सितंबर 2000 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 25 सितंबर 2000, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 सितंबर 2000 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (08:26 तक), नक्षत्र मघा (02:31, 26 सित॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 06:56 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:29
रात 05:26 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 02:31 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2000 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:26 तक
कृष्ण त्रयोदशी 05:54, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 02:31, 26 सित॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 00:51, 27 सित॰ तक
योग
सिद्ध 06:56 तक
साध्य 03:44, 26 सित॰ तक
शुभ 00:38, 27 सित॰ तक
करण
तैतिल 08:26 तक
गर 19:10 तक
वणिज 05:54, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
02:37
चंद्रास्त
15:57
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:52

अशुभ समय

राहुकाल
06:56 – 08:27
यमगंड
09:57 – 11:27
गुलिक काल
12:58 – 14:28

25 सितंबर 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:26 – 06:56शुभ
काल06:56 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:57शुभ
रोग09:57 – 11:27टालें
उद्वेग11:27 – 12:58टालें
चर12:58 – 14:28सामान्य
लाभ14:28 – 15:59शुभ
अमृत15:59 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:29 – 18:59सामान्य
रोग18:59 – 20:29टालें
काल20:29 – 21:58टालें
लाभ21:58 – 23:28शुभ
उद्वेग23:28 – 00:57टालें
शुभ00:57 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2606:26दिन
शनि06:2607:26दिन
गुरु07:2608:27दिन
मंगल08:2709:27दिन
सूर्य09:2710:27दिन
शुक्र10:2711:27दिन
बुध11:2712:28दिन
चंद्र12:2813:28दिन
शनि13:2814:28दिन
गुरु14:2815:29दिन
मंगल15:2916:29दिन
सूर्य16:2917:29दिन
शुक्र17:2918:29रात
बुध18:2919:29रात
चंद्र19:2920:29रात
शनि20:2921:28रात
गुरु21:2822:28रात
मंगल22:2823:28रात
सूर्य23:2800:27रात
शुक्र00:2701:27रात
बुध01:2702:27रात
चंद्र02:2703:26रात
शनि03:2604:26रात
गुरु04:2605:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 सित॰ 2000आश्विन अमावस्याअमावस्या
1 अक्टू॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 अक्टू॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 अक्टू॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अक्टू॰ 2000आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2000तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8673° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।