29 अक्टूबर 2001 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 29 अक्टूबर 2001, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 29 अक्टूबर 2001 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (07:09 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (04:34, 30 अक्टू॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 07:04 से 08:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:00
रात 05:39 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 04:34 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2001 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 07:09 तक
शुक्ल त्रयोदशी 08:56, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 04:34, 30 अक्टू॰ तक
रेवती 06:31, 31 अक्टू॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 17:33 तक
हर्षण 17:44, 30 अक्टू॰ तक
करण
बालव 07:09 तक
कौलव 20:06 तक
तैतिल 08:56, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
15:33
चंद्रास्त
02:56
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:42

अशुभ समय

राहुकाल
07:04 – 08:29
यमगंड
09:54 – 11:20
गुलिक काल
12:45 – 14:10

29 अक्टूबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:39 – 07:04शुभ
काल07:04 – 08:29टालें
शुभ08:29 – 09:54शुभ
रोग09:54 – 11:20टालें
उद्वेग11:20 – 12:45टालें
चर12:45 – 14:10सामान्य
लाभ14:10 – 15:35शुभ
अमृत15:35 – 17:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:00 – 18:35सामान्य
रोग18:35 – 20:10टालें
काल20:10 – 21:45टालें
लाभ21:45 – 23:20शुभ
उद्वेग23:20 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:30शुभ
अमृत02:30 – 04:04शुभ
चर04:04 – 05:39सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3906:36दिन
शनि06:3607:32दिन
गुरु07:3208:29दिन
मंगल08:2909:26दिन
सूर्य09:2610:23दिन
शुक्र10:2311:20दिन
बुध11:2012:16दिन
चंद्र12:1613:13दिन
शनि13:1314:10दिन
गुरु14:1015:07दिन
मंगल15:0716:04दिन
सूर्य16:0417:00दिन
शुक्र17:0018:04रात
बुध18:0419:07रात
चंद्र19:0720:10रात
शनि20:1021:13रात
गुरु21:1322:17रात
मंगल22:1723:20रात
सूर्य23:2000:23रात
शुक्र00:2301:26रात
बुध01:2602:30रात
चंद्र02:3003:33रात
शनि03:3304:36रात
गुरु04:3605:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 नव॰ 2001आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
5 नव॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 नव॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 नव॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 नव॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 नव॰ 2001कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2001वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8825° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।