21 सितंबर 2003 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 21 सितंबर 2003, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 21 सितंबर 2003 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (15:50 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (14:22 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 16:03 से 17:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 17:34
रात 05:25 तक
तिथि
दशमी, 15:50 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 14:22 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 सितंबर 2003 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 15:50 तक
कृष्ण एकादशी 15:48, 22 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 15:01, 22 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 00:40, 22 सित॰ तक
शिव 23:20, 22 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:50 तक
बव 03:55, 22 सित॰ तक
बालव 15:48, 22 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 08:04 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
00:21
चंद्रास्त
14:23
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
16:03 – 17:34
यमगंड
11:29 – 13:00
गुलिक काल
14:32 – 16:03

21 सितंबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:24 – 06:55टालें
चर06:55 – 08:27सामान्य
लाभ08:27 – 09:58शुभ
अमृत09:58 – 11:29शुभ
काल11:29 – 13:00टालें
शुभ13:00 – 14:32शुभ
रोग14:32 – 16:03टालें
उद्वेग16:03 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:34 – 19:03शुभ
अमृत19:03 – 20:32शुभ
चर20:32 – 22:01सामान्य
रोग22:01 – 23:29टालें
काल23:29 – 00:58टालें
लाभ00:58 – 02:27शुभ
उद्वेग02:27 – 03:56टालें
शुभ03:56 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2406:25दिन
शुक्र06:2507:26दिन
बुध07:2608:27दिन
चंद्र08:2709:28दिन
शनि09:2810:28दिन
गुरु10:2811:29दिन
मंगल11:2912:30दिन
सूर्य12:3013:31दिन
शुक्र13:3114:32दिन
बुध14:3215:32दिन
चंद्र15:3216:33दिन
शनि16:3317:34दिन
गुरु17:3418:33रात
मंगल18:3319:32रात
सूर्य19:3220:32रात
शुक्र20:3221:31रात
बुध21:3122:30रात
चंद्र22:3023:29रात
शनि23:2900:29रात
गुरु00:2901:28रात
मंगल01:2802:27रात
सूर्य02:2703:26रात
शुक्र03:2604:25रात
बुध04:2505:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 सित॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 सित॰ 2003आश्विन अमावस्याअमावस्या
29 सित॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 अक्टू॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2003आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
14 अक्टू॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2003तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9090° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।