4 अक्टूबर 2003 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 4 अक्टूबर 2003, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 4 अक्टूबर 2003 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (10:42 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (20:14 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 17:21
रात 05:29 तक
तिथि
नवमी, 10:42 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 20:14 तक
श्रवण
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2003 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 10:42 तक
शुक्ल दशमी 09:57, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 20:20, 5 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 08:30 तक
सुकर्मा 06:45, 5 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 10:42 तक
तैतिल 22:16 तक
गर 09:57, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
13:45
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:49

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:56
यमगंड
12:54 – 14:23
गुलिक काल
05:28 – 06:57

4 अक्टूबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:28 – 06:57टालें
शुभ06:57 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:56टालें
उद्वेग09:56 – 11:25टालें
चर11:25 – 12:54सामान्य
लाभ12:54 – 14:23शुभ
अमृत14:23 – 15:52शुभ
काल15:52 – 17:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:21 – 18:52शुभ
उद्वेग18:52 – 20:23टालें
शुभ20:23 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:25शुभ
चर23:25 – 00:56सामान्य
रोग00:56 – 02:27टालें
काल02:27 – 03:58टालें
लाभ03:58 – 05:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2806:28दिन
गुरु06:2807:27दिन
मंगल07:2708:27दिन
सूर्य08:2709:26दिन
शुक्र09:2610:25दिन
बुध10:2511:25दिन
चंद्र11:2512:24दिन
शनि12:2413:24दिन
गुरु13:2414:23दिन
मंगल14:2315:22दिन
सूर्य15:2216:22दिन
शुक्र16:2217:21दिन
बुध17:2118:22रात
चंद्र18:2219:23रात
शनि19:2320:23रात
गुरु20:2321:24रात
मंगल21:2422:24रात
सूर्य22:2423:25रात
शुक्र23:2500:26रात
बुध00:2601:26रात
चंद्र01:2602:27रात
शनि02:2703:27रात
गुरु03:2704:28रात
मंगल04:2805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2003आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
14 अक्टू॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2003तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 अक्टू॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 अक्टू॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2003कार्तिक अमावस्याअमावस्या
28 अक्टू॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9095° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।