30 अक्टूबर 2004 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 30 अक्टूबर 2004, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 30 अक्टूबर 2004 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (10:53 तक), नक्षत्र कृत्तिका (16:22 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 08:30 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:00
रात 05:40 तक
तिथि
द्वितीया, 10:53 तक
तृतीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 16:22 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2004 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:53 तक
कृष्ण तृतीया 12:43, 31 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:48, 31 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 04:21, 31 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 04:53, 1 नव॰ तक
करण
गर 10:53 तक
वणिज 23:45 तक
विष्टि (भद्रा) 12:43, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
18:27
चंद्रास्त
07:26
दिनमान
11h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:42

अशुभ समय

राहुकाल
08:30 – 09:55
यमगंड
12:45 – 14:10
गुलिक काल
05:39 – 07:05

30 अक्टूबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:39 – 07:05टालें
शुभ07:05 – 08:30शुभ
रोग08:30 – 09:55टालें
उद्वेग09:55 – 11:20टालें
चर11:20 – 12:45सामान्य
लाभ12:45 – 14:10शुभ
अमृत14:10 – 15:35शुभ
काल15:35 – 17:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:00 – 18:35शुभ
उद्वेग18:35 – 20:10टालें
शुभ20:10 – 21:45शुभ
अमृत21:45 – 23:20शुभ
चर23:20 – 00:55सामान्य
रोग00:55 – 02:30टालें
काल02:30 – 04:05टालें
लाभ04:05 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3906:36दिन
गुरु06:3607:33दिन
मंगल07:3308:30दिन
सूर्य08:3009:26दिन
शुक्र09:2610:23दिन
बुध10:2311:20दिन
चंद्र11:2012:16दिन
शनि12:1613:13दिन
गुरु13:1314:10दिन
मंगल14:1015:06दिन
सूर्य15:0616:03दिन
शुक्र16:0317:00दिन
बुध17:0018:03रात
चंद्र18:0319:06रात
शनि19:0620:10रात
गुरु20:1021:13रात
मंगल21:1322:16रात
सूर्य22:1623:20रात
शुक्र23:2000:23रात
बुध00:2301:27रात
चंद्र01:2702:30रात
शनि02:3003:33रात
गुरु03:3304:37रात
मंगल04:3705:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 नव॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 नव॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 नव॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 नव॰ 2004कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2004वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नव॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 नव॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 नव॰ 2004कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9245° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।