30 सितंबर 2005 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 30 सितंबर 2005, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 सितंबर 2005 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (10:31 तक), नक्षत्र मघा (22:50 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 09:56 से 11:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 17:25
रात 05:27 तक
तिथि
द्वादशी, 10:31 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 22:50 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2005 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 10:31 तक
कृष्ण त्रयोदशी 12:42, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:50 तक
पूर्वा फाल्गुनी 01:23, 2 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 15:58 तक
शुभ 16:36, 1 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 10:31 तक
गर 23:39 तक
वणिज 12:42, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
02:37
चंद्रास्त
15:49
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:02 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
09:56 – 11:26
यमगंड
14:25 – 15:55
गुलिक काल
06:57 – 08:27

30 सितंबर 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:27 – 06:57सामान्य
लाभ06:57 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:56शुभ
काल09:56 – 11:26टालें
शुभ11:26 – 12:56शुभ
रोग12:56 – 14:25टालें
उद्वेग14:25 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:25सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:25 – 18:55टालें
काल18:55 – 20:25टालें
लाभ20:25 – 21:56शुभ
उद्वेग21:56 – 23:26टालें
शुभ23:26 – 00:56शुभ
अमृत00:56 – 02:27शुभ
चर02:27 – 03:57सामान्य
रोग03:57 – 05:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2706:27दिन
बुध06:2707:27दिन
चंद्र07:2708:27दिन
शनि08:2709:26दिन
गुरु09:2610:26दिन
मंगल10:2611:26दिन
सूर्य11:2612:26दिन
शुक्र12:2613:25दिन
बुध13:2514:25दिन
चंद्र14:2515:25दिन
शनि15:2516:25दिन
गुरु16:2517:25दिन
मंगल17:2518:25रात
सूर्य18:2519:25रात
शुक्र19:2520:25रात
बुध20:2521:26रात
चंद्र21:2622:26रात
शनि22:2623:26रात
गुरु23:2600:26रात
मंगल00:2601:27रात
सूर्य01:2702:27रात
शुक्र02:2703:27रात
बुध03:2704:27रात
चंद्र04:2705:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2005आश्विन अमावस्याअमावस्या
7 अक्टू॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 अक्टू॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 अक्टू॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2005आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2005तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अक्टू॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9373° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।