11 सितंबर 2006 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 11 सितंबर 2006, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 11 सितंबर 2006 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (10:24 तक), नक्षत्र अश्विनी (11:59 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 06:54 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 17:44
रात 05:22 तक
तिथि
चतुर्थी, 10:24 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 11:59 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2006 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 10:24 तक
कृष्ण पंचमी 07:57, 12 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 10:21, 12 सित॰ तक
योग
ध्रुव 15:26 तक
व्याघातअशुभ 12:27, 12 सित॰ तक
करण
बालव 10:24 तक
कौलव 21:06 तक
तैतिल 07:57, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
20:16
चंद्रास्त
08:51
दिनमान
12h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:08 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
06:54 – 08:27
यमगंड
10:00 – 11:33
गुलिक काल
13:05 – 14:38

11 सितंबर 2006 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:21 – 06:54शुभ
काल06:54 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 10:00शुभ
रोग10:00 – 11:33टालें
उद्वेग11:33 – 13:05टालें
चर13:05 – 14:38सामान्य
लाभ14:38 – 16:11शुभ
अमृत16:11 – 17:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:44 – 19:11सामान्य
रोग19:11 – 20:38टालें
काल20:38 – 22:06टालें
लाभ22:06 – 23:33शुभ
उद्वेग23:33 – 01:00टालें
शुभ01:00 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 03:54शुभ
चर03:54 – 05:22सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2106:23दिन
शनि06:2307:25दिन
गुरु07:2508:27दिन
मंगल08:2709:29दिन
सूर्य09:2910:31दिन
शुक्र10:3111:33दिन
बुध11:3312:34दिन
चंद्र12:3413:36दिन
शनि13:3614:38दिन
गुरु14:3815:40दिन
मंगल15:4016:42दिन
सूर्य16:4217:44दिन
शुक्र17:4418:42रात
बुध18:4219:40रात
चंद्र19:4020:38रात
शनि20:3821:36रात
गुरु21:3622:35रात
मंगल22:3523:33रात
सूर्य23:3300:31रात
शुक्र00:3101:29रात
बुध01:2902:27रात
चंद्र02:2703:25रात
शनि03:2504:24रात
गुरु04:2405:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2006संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2006कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2006कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2006कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 सित॰ 2006प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 सित॰ 2006आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2006शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2006प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2006आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2006संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9505° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।