27 सितंबर 2011 को कोलकाता का पंचांग

मंगलवार, 27 सितंबर 2011, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 27 सितंबर 2011 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:38 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (16:40 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 14:28 से 15:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:28
रात 05:26 तक
तिथि
अमावस्या, 16:38 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 16:40 तक
हस्त
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 सितंबर 2011 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 16:38 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:47, 28 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:37, 28 सित॰ तक
योग
शुक्ल 16:42 तक
ब्रह्म 12:23, 28 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 06:32 तक
नाग 16:38 तक
किंस्तुघ्न 02:43, 28 सित॰ तक
बव 12:47, 28 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
05:00
चंद्रास्त
17:10
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
14:28 – 15:58
यमगंड
08:27 – 09:57
गुलिक काल
11:27 – 12:57

27 सितंबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:26 – 06:56टालें
उद्वेग06:56 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:57सामान्य
लाभ09:57 – 11:27शुभ
अमृत11:27 – 12:57शुभ
काल12:57 – 14:28टालें
शुभ14:28 – 15:58शुभ
रोग15:58 – 17:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:28 – 18:58टालें
लाभ18:58 – 20:28शुभ
उद्वेग20:28 – 21:57टालें
शुभ21:57 – 23:27शुभ
अमृत23:27 – 00:57शुभ
चर00:57 – 02:27सामान्य
रोग02:27 – 03:57टालें
काल03:57 – 05:26टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2606:26दिन
सूर्य06:2607:26दिन
शुक्र07:2608:27दिन
बुध08:2709:27दिन
चंद्र09:2710:27दिन
शनि10:2711:27दिन
गुरु11:2712:27दिन
मंगल12:2713:27दिन
सूर्य13:2714:28दिन
शुक्र14:2815:28दिन
बुध15:2816:28दिन
चंद्र16:2817:28दिन
शनि17:2818:28रात
गुरु18:2819:28रात
मंगल19:2820:28रात
सूर्य20:2821:27रात
शुक्र21:2722:27रात
बुध22:2723:27रात
चंद्र23:2700:27रात
शनि00:2701:27रात
गुरु01:2702:27रात
मंगल02:2703:27रात
सूर्य03:2704:27रात
शुक्र04:2705:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 सित॰ 2011आश्विन अमावस्याअमावस्या
30 सित॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 अक्टू॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 अक्टू॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 अक्टू॰ 2011आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
16 अक्टू॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2011तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अक्टू॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2011कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0210° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।