30 सितंबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 30 सितंबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 30 सितंबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (08:48 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (15:13 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 15:55 से 17:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 17:24
रात 05:28 तक
तिथि
पूर्णिमा, 08:48 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 15:13 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2012 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 08:48 तक
कृष्ण प्रतिपदा 10:03, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 17:10, 1 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 08:48 तक
ध्रुव 08:43, 1 अक्टू॰ तक
करण
बव 08:48 तक
बालव 21:22 तक
कौलव 10:03, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
17:22
चंद्रास्त
05:23
दिनमान
11h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:02 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
15:55 – 17:24
यमगंड
11:26 – 12:55
गुलिक काल
14:25 – 15:55

30 सितंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:27 – 06:57टालें
चर06:57 – 08:27सामान्य
लाभ08:27 – 09:56शुभ
अमृत09:56 – 11:26शुभ
काल11:26 – 12:55टालें
शुभ12:55 – 14:25शुभ
रोग14:25 – 15:55टालें
उद्वेग15:55 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:24 – 18:55शुभ
अमृत18:55 – 20:25शुभ
चर20:25 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:26टालें
काल23:26 – 00:56टालें
लाभ00:56 – 02:27शुभ
उद्वेग02:27 – 03:57टालें
शुभ03:57 – 05:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2706:27दिन
शुक्र06:2707:27दिन
बुध07:2708:27दिन
चंद्र08:2709:26दिन
शनि09:2610:26दिन
गुरु10:2611:26दिन
मंगल11:2612:26दिन
सूर्य12:2613:25दिन
शुक्र13:2514:25दिन
बुध14:2515:25दिन
चंद्र15:2516:25दिन
शनि16:2517:24दिन
गुरु17:2418:25रात
मंगल18:2519:25रात
सूर्य19:2520:25रात
शुक्र20:2521:25रात
बुध21:2522:26रात
चंद्र22:2623:26रात
शनि23:2600:26रात
गुरु00:2601:26रात
मंगल01:2602:27रात
सूर्य02:2703:27रात
शुक्र03:2704:27रात
बुध04:2705:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2012भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 अक्टू॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 अक्टू॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 अक्टू॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2012आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2012तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0351° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।