4 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (16:30 तक), नक्षत्र कृत्तिका (01:29, 5 अक्टू॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 12:54 से 14:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 17:21
रात 05:29 तक
तिथि
चतुर्थी, 16:30 तक
पंचमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 01:29 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 16:30 तक
कृष्ण पंचमी 19:11, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 01:29, 5 अक्टू॰ तक
रोहिणी 04:39, 6 अक्टू॰ तक
योग
वज्रअशुभ 10:33 तक
सिद्धि 11:36, 5 अक्टू॰ तक
करण
बालव 16:30 तक
कौलव 05:50, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
20:04
चंद्रास्त
08:50
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
12:54 – 14:23
यमगंड
05:29 – 06:58
गुलिक काल
08:27 – 09:56

4 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:29 – 06:58शुभ
रोग06:58 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:56टालें
चर09:56 – 11:25सामान्य
लाभ11:25 – 12:54शुभ
अमृत12:54 – 14:23शुभ
काल14:23 – 15:52टालें
शुभ15:52 – 17:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:21 – 18:52शुभ
चर18:52 – 20:23सामान्य
रोग20:23 – 21:54टालें
काल21:54 – 23:25टालें
लाभ23:25 – 00:56शुभ
उद्वेग00:56 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2906:28दिन
मंगल06:2807:27दिन
सूर्य07:2708:27दिन
शुक्र08:2709:26दिन
बुध09:2610:25दिन
चंद्र10:2511:25दिन
शनि11:2512:24दिन
गुरु12:2413:23दिन
मंगल13:2314:23दिन
सूर्य14:2315:22दिन
शुक्र15:2216:21दिन
बुध16:2117:21दिन
चंद्र17:2118:21रात
शनि18:2119:22रात
गुरु19:2220:23रात
मंगल20:2321:23रात
सूर्य21:2322:24रात
शुक्र22:2423:25रात
बुध23:2500:25रात
चंद्र00:2501:26रात
शनि01:2602:27रात
गुरु02:2703:27रात
मंगल03:2704:28रात
सूर्य04:2805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अक्टू॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 अक्टू॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 अक्टू॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2012आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2012तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0353° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।