12 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (01:12, 13 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मघा (13:54 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 09:55 से 11:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 17:13
रात 05:32 तक
तिथि
द्वादशी, 01:12 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 13:54 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 01:12, 13 अक्टू॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 23:09, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 13:54 तक
पूर्वा फाल्गुनी 12:53, 13 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 10:33 तक
शुक्ल 08:07, 13 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 13:59 तक
तैतिल 01:12, 13 अक्टू॰ तक
गर 12:15, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
02:06
चंद्रास्त
14:47
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
09:55 – 11:22
यमगंड
14:18 – 15:46
गुलिक काल
06:59 – 08:27

12 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:31 – 06:59सामान्य
लाभ06:59 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:55शुभ
काल09:55 – 11:22टालें
शुभ11:22 – 12:50शुभ
रोग12:50 – 14:18टालें
उद्वेग14:18 – 15:46टालें
चर15:46 – 17:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:13 – 18:46टालें
काल18:46 – 20:18टालें
लाभ20:18 – 21:50शुभ
उद्वेग21:50 – 23:23टालें
शुभ23:23 – 00:55शुभ
अमृत00:55 – 02:27शुभ
चर02:27 – 03:59सामान्य
रोग03:59 – 05:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3106:30दिन
बुध06:3007:28दिन
चंद्र07:2808:27दिन
शनि08:2709:25दिन
गुरु09:2510:24दिन
मंगल10:2411:22दिन
सूर्य11:2212:21दिन
शुक्र12:2113:19दिन
बुध13:1914:18दिन
चंद्र14:1815:16दिन
शनि15:1616:15दिन
गुरु16:1517:13दिन
मंगल17:1318:15रात
सूर्य18:1519:16रात
शुक्र19:1620:18रात
बुध20:1821:19रात
चंद्र21:1922:21रात
शनि22:2123:23रात
गुरु23:2300:24रात
मंगल00:2401:26रात
सूर्य01:2602:27रात
शुक्र02:2703:29रात
बुध03:2904:30रात
चंद्र04:3005:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2012आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2012तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0356° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।