20 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (23:36 तक), नक्षत्र मूल (19:34 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 08:28 से 09:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:07
रात 05:35 तक
तिथि
षष्ठी, 23:36 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मूल, 19:34 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 23:36 तक
शुक्ल सप्तमी 21:45, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 19:34 तक
पूर्वाषाढ़ा 18:21, 21 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:30, 21 अक्टू॰ तक
सुकर्मा 21:52, 21 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:43 तक
तैतिल 23:36 तक
गर 10:37, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
10:24
चंद्रास्त
21:40
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:44

अशुभ समय

राहुकाल
08:28 – 09:54
यमगंड
12:47 – 14:14
गुलिक काल
05:35 – 07:01

20 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:35 – 07:01टालें
शुभ07:01 – 08:28शुभ
रोग08:28 – 09:54टालें
उद्वेग09:54 – 11:21टालें
चर11:21 – 12:47सामान्य
लाभ12:47 – 14:14शुभ
अमृत14:14 – 15:40शुभ
काल15:40 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:07 – 18:40शुभ
उद्वेग18:40 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:47शुभ
अमृत21:47 – 23:21शुभ
चर23:21 – 00:54सामान्य
रोग00:54 – 02:28टालें
काल02:28 – 04:02टालें
लाभ04:02 – 05:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3506:32दिन
गुरु06:3207:30दिन
मंगल07:3008:28दिन
सूर्य08:2809:25दिन
शुक्र09:2510:23दिन
बुध10:2311:21दिन
चंद्र11:2112:18दिन
शनि12:1813:16दिन
गुरु13:1614:14दिन
मंगल14:1415:11दिन
सूर्य15:1116:09दिन
शुक्र16:0917:07दिन
बुध17:0718:09रात
चंद्र18:0919:11रात
शनि19:1120:14रात
गुरु20:1421:16रात
मंगल21:1622:19रात
सूर्य22:1923:21रात
शुक्र23:2100:23रात
बुध00:2301:26रात
चंद्र01:2602:28रात
शनि02:2803:30रात
गुरु03:3004:33रात
मंगल04:3305:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0359° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।