21 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 21 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 21 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (21:45 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (18:21 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:06 पर है। राहुकाल 15:40 से 17:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:06
रात 05:36 तक
तिथि
सप्तमी, 21:45 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 18:21 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 21:45 तक
शुक्ल अष्टमी 20:26, 22 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 17:38, 22 अक्टू॰ तक
योग
सुकर्मा 21:52 तक
धृति 19:38, 22 अक्टू॰ तक
करण
गर 10:37 तक
वणिज 21:45 तक
विष्टि (भद्रा) 09:02, 22 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 00:08, 22 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:06
चंद्रोदय
11:18
चंद्रास्त
22:41
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:44

अशुभ समय

राहुकाल
15:40 – 17:06
यमगंड
11:21 – 12:47
गुलिक काल
14:13 – 15:40

21 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:35 – 07:01टालें
चर07:01 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 09:54शुभ
अमृत09:54 – 11:21शुभ
काल11:21 – 12:47टालें
शुभ12:47 – 14:13शुभ
रोग14:13 – 15:40टालें
उद्वेग15:40 – 17:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:06 – 18:40शुभ
अमृत18:40 – 20:13शुभ
चर20:13 – 21:47सामान्य
रोग21:47 – 23:21टालें
काल23:21 – 00:54टालें
लाभ00:54 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 04:02टालें
शुभ04:02 – 05:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3506:33दिन
शुक्र06:3307:30दिन
बुध07:3008:28दिन
चंद्र08:2809:25दिन
शनि09:2510:23दिन
गुरु10:2311:21दिन
मंगल11:2112:18दिन
सूर्य12:1813:16दिन
शुक्र13:1614:13दिन
बुध14:1315:11दिन
चंद्र15:1116:08दिन
शनि16:0817:06दिन
गुरु17:0618:08रात
मंगल18:0819:11रात
सूर्य19:1120:13रात
शुक्र20:1321:16रात
बुध21:1622:18रात
चंद्र22:1823:21रात
शनि23:2100:23रात
गुरु00:2301:26रात
मंगल01:2602:28रात
सूर्य02:2803:31रात
शुक्र03:3104:33रात
बुध04:3305:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0359° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।