22 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (20:26 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (17:38 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 17:05 पर है। राहुकाल 07:02 से 08:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 17:05
रात 05:36 तक
तिथि
अष्टमी, 20:26 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 17:38 तक
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 20:26 तक
शुक्ल नवमी 19:38, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:27, 23 अक्टू॰ तक
योग
धृति 19:38 तक
शूलअशुभ 17:49, 23 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:02 तक
बव 20:26 तक
बालव 07:58, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
17:05
चंद्रोदय
12:07
चंद्रास्त
23:40
दिनमान
11h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:43

अशुभ समय

राहुकाल
07:02 – 08:28
यमगंड
09:54 – 11:20
गुलिक काल
12:47 – 14:13

22 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:36 – 07:02शुभ
काल07:02 – 08:28टालें
शुभ08:28 – 09:54शुभ
रोग09:54 – 11:20टालें
उद्वेग11:20 – 12:47टालें
चर12:47 – 14:13सामान्य
लाभ14:13 – 15:39शुभ
अमृत15:39 – 17:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:05 – 18:39सामान्य
रोग18:39 – 20:13टालें
काल20:13 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:21शुभ
उद्वेग23:21 – 00:54टालें
शुभ00:54 – 02:28शुभ
अमृत02:28 – 04:02शुभ
चर04:02 – 05:36सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3606:33दिन
शनि06:3307:31दिन
गुरु07:3108:28दिन
मंगल08:2809:25दिन
सूर्य09:2510:23दिन
शुक्र10:2311:20दिन
बुध11:2012:18दिन
चंद्र12:1813:15दिन
शनि13:1514:13दिन
गुरु14:1315:10दिन
मंगल15:1016:08दिन
सूर्य16:0817:05दिन
शुक्र17:0518:08रात
बुध18:0819:10रात
चंद्र19:1020:13रात
शनि20:1321:15रात
गुरु21:1522:18रात
मंगल22:1823:21रात
सूर्य23:2100:23रात
शुक्र00:2301:26रात
बुध01:2602:28रात
चंद्र02:2803:31रात
शनि03:3104:33रात
गुरु04:3305:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0359° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।