19 सितंबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 19 सितंबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 19 सितंबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (15:06 तक), नक्षत्र अश्विनी (22:28 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 06:55 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 17:35
रात 05:24 तक
तिथि
तृतीया, 15:06 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
अश्विनी, 22:28 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 सितंबर 2016 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 15:06 तक
कृष्ण चतुर्थी 11:57, 20 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:10, 20 सित॰ तक
योग
ध्रुव 12:43 तक
व्याघातअशुभ 09:00, 20 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:06 तक
बव 01:31, 20 सित॰ तक
बालव 11:57, 20 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
19:45
चंद्रास्त
07:45
दिनमान
12h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:54

अशुभ समय

राहुकाल
06:55 – 08:27
यमगंड
09:58 – 11:30
गुलिक काल
13:01 – 14:32

19 सितंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:24 – 06:55शुभ
काल06:55 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:58शुभ
रोग09:58 – 11:30टालें
उद्वेग11:30 – 13:01टालें
चर13:01 – 14:32सामान्य
लाभ14:32 – 16:04शुभ
अमृत16:04 – 17:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:35 – 19:04सामान्य
रोग19:04 – 20:32टालें
काल20:32 – 22:01टालें
लाभ22:01 – 23:30शुभ
उद्वेग23:30 – 00:58टालें
शुभ00:58 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:24सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2406:25दिन
शनि06:2507:26दिन
गुरु07:2608:27दिन
मंगल08:2709:28दिन
सूर्य09:2810:29दिन
शुक्र10:2911:30दिन
बुध11:3012:31दिन
चंद्र12:3113:31दिन
शनि13:3114:32दिन
गुरु14:3215:33दिन
मंगल15:3316:34दिन
सूर्य16:3417:35दिन
शुक्र17:3518:34रात
बुध18:3419:33रात
चंद्र19:3320:32रात
शनि20:3221:32रात
गुरु21:3222:31रात
मंगल22:3123:30रात
सूर्य23:3000:29रात
शुक्र00:2901:28रात
बुध01:2802:27रात
चंद्र02:2703:26रात
शनि03:2604:25रात
गुरु04:2505:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 सित॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2016आश्विन अमावस्याअमावस्या
5 अक्टू॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2016आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2016तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0906° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।