3 अक्टूबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 3 अक्टूबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 अक्टूबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (10:05 तक), नक्षत्र स्वाति (05:41, 4 अक्टू॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 06:57 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 17:21
रात 05:29 तक
तिथि
द्वितीया, 10:05 तक
तृतीया
नक्षत्र
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2016 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 10:05 तक
शुक्ल तृतीया 12:34, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 05:41, 4 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 16:23 तक
विष्कंभअशुभ 17:19, 4 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 10:05 तक
तैतिल 23:18 तक
गर 12:34, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
07:11
चंद्रास्त
18:59
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:49

अशुभ समय

राहुकाल
06:57 – 08:27
यमगंड
09:56 – 11:25
गुलिक काल
12:54 – 14:23

3 अक्टूबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:28 – 06:57शुभ
काल06:57 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:56शुभ
रोग09:56 – 11:25टालें
उद्वेग11:25 – 12:54टालें
चर12:54 – 14:23सामान्य
लाभ14:23 – 15:52शुभ
अमृत15:52 – 17:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:21 – 18:52सामान्य
रोग18:52 – 20:23टालें
काल20:23 – 21:54टालें
लाभ21:54 – 23:25शुभ
उद्वेग23:25 – 00:56टालें
शुभ00:56 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 03:58शुभ
चर03:58 – 05:29सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2806:28दिन
शनि06:2807:27दिन
गुरु07:2708:27दिन
मंगल08:2709:26दिन
सूर्य09:2610:25दिन
शुक्र10:2511:25दिन
बुध11:2512:24दिन
चंद्र12:2413:24दिन
शनि13:2414:23दिन
गुरु14:2315:23दिन
मंगल15:2316:22दिन
सूर्य16:2217:21दिन
शुक्र17:2118:22रात
बुध18:2219:23रात
चंद्र19:2320:23रात
शनि20:2321:24रात
गुरु21:2422:24रात
मंगल22:2423:25रात
सूर्य23:2500:26रात
शुक्र00:2601:26रात
बुध01:2602:27रात
चंद्र02:2703:27रात
शनि03:2704:28रात
गुरु04:2805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2016आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2016तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2016कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0911° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।