स्वाति नक्षत्र

स्वाति, हवा में झूमता नन्हा अंकुर, के स्वामी राहु और देवता वायु हैं। यह स्वतंत्रता, लचीलापन और व्यापार की प्रतिभा देता है।

विशेषताएं

  • स्वतंत्र
  • कूटनीतिक
  • लचीले
  • बेचैन

अनुकूल करियर

  • व्यवसाय और व्यापार
  • कानून
  • यात्रा
  • विमानन

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1तुला6° 40′ 00″ – 10° 00′ 00″धनुRu
2तुला10° 00′ 00″ – 13° 20′ 00″मकरRe
3तुला13° 20′ 00″ – 16° 40′ 00″कुंभRo
4तुला16° 40′ 00″ – 20° 00′ 00″मीनTa

पिछला: चित्रा। अगला: विशाखा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन है?

राहु। जिनके जन्म के समय चंद्रमा स्वाति में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की राहु महादशा से शुरू होता है।

स्वाति के नाम अक्षर कौन-से हैं?

स्वाति के चार पद Ru, Re, Ro, Ta अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

स्वाति किस गण और नाड़ी का है?

स्वाति देव गण, अंत्य नाड़ी और महिष योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।