चित्रा नक्षत्र

चित्रा, यानी चमकता रत्न, देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा का नक्षत्र है। यह डिज़ाइन और सुंदरता की गहरी समझ तथा कुछ अनोखा रचने की लगन देता है।

विशेषताएं

  • कलात्मक
  • स्टाइलिश
  • आकर्षक व्यक्तित्व
  • अपनी मर्ज़ी के मालिक

अनुकूल करियर

  • वास्तुकला और डिज़ाइन
  • आभूषण
  • फ़ैशन
  • इंजीनियरिंग

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1कन्या23° 20′ 00″ – 26° 40′ 00″सिंहPe
2कन्या26° 40′ 00″ – 30° 00′ 00″कन्याPo
3तुला0° 00′ 00″ – 3° 20′ 00″तुलाRa
4तुला3° 20′ 00″ – 6° 40′ 00″वृश्चिकRi

पिछला: हस्त। अगला: स्वाति।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चित्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

मंगल। जिनके जन्म के समय चंद्रमा चित्रा में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की मंगल महादशा से शुरू होता है।

चित्रा के नाम अक्षर कौन-से हैं?

चित्रा के चार पद Pe, Po, Ra, Ri अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

चित्रा किस गण और नाड़ी का है?

चित्रा राक्षस गण, मध्य नाड़ी और व्याघ्र योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।