14 अक्टूबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (16:36 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (16:25 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 09:54 से 11:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 17:12
रात 05:33 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:36 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 16:25 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अक्टूबर 2016 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 16:36 तक
शुक्ल चतुर्दशी 13:25, 15 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 14:00, 15 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 10:06 तक
ध्रुव 06:28, 15 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 06:00 तक
तैतिल 16:36 तक
गर 03:04, 15 अक्टू॰ तक
वणिज 13:25, 15 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 10:57 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
15:59
चंद्रास्त
03:18
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:45

अशुभ समय

राहुकाल
09:54 – 11:22
यमगंड
14:17 – 15:44
गुलिक काल
07:00 – 08:27

14 अक्टूबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:32 – 07:00सामान्य
लाभ07:00 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:54शुभ
काल09:54 – 11:22टालें
शुभ11:22 – 12:49शुभ
रोग12:49 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:44टालें
चर15:44 – 17:12सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:12 – 18:44टालें
काल18:44 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:49शुभ
उद्वेग21:49 – 23:22टालें
शुभ23:22 – 00:55शुभ
अमृत00:55 – 02:27शुभ
चर02:27 – 04:00सामान्य
रोग04:00 – 05:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3206:30दिन
बुध06:3007:29दिन
चंद्र07:2908:27दिन
शनि08:2709:25दिन
गुरु09:2510:24दिन
मंगल10:2411:22दिन
सूर्य11:2212:20दिन
शुक्र12:2013:18दिन
बुध13:1814:17दिन
चंद्र14:1715:15दिन
शनि15:1516:13दिन
गुरु16:1317:12दिन
मंगल17:1218:13रात
सूर्य18:1319:15रात
शुक्र19:1520:17रात
बुध20:1721:19रात
चंद्र21:1922:20रात
शनि22:2023:22रात
गुरु23:2200:24रात
मंगल00:2401:26रात
सूर्य01:2602:27रात
शुक्र02:2703:29रात
बुध03:2904:31रात
चंद्र04:3105:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2016आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2016तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2016कार्तिक अमावस्याअमावस्या
4 नव॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0915° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।