15 अक्टूबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (13:25 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (14:00 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 17:11 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 17:11
रात 05:33 तक
तिथि
चतुर्दशी, 13:25 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 14:00 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2016 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 13:25 तक
पूर्णिमा 09:53, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 11:14, 16 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 06:28 तक
व्याघातअशुभ 02:30, 16 अक्टू॰ तक
हर्षण 22:18, 16 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 13:25 तक
विष्टि (भद्रा) 23:41 तक
बव 09:53, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
17:11
चंद्रोदय
16:45
चंद्रास्त
04:20
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:45

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:54
यमगंड
12:49 – 14:16
गुलिक काल
05:33 – 07:00

15 अक्टूबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:33 – 07:00टालें
शुभ07:00 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:54टालें
उद्वेग09:54 – 11:22टालें
चर11:22 – 12:49सामान्य
लाभ12:49 – 14:16शुभ
अमृत14:16 – 15:43शुभ
काल15:43 – 17:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:11 – 18:43शुभ
उद्वेग18:43 – 20:16टालें
शुभ20:16 – 21:49शुभ
अमृत21:49 – 23:22शुभ
चर23:22 – 00:55सामान्य
रोग00:55 – 02:27टालें
काल02:27 – 04:00टालें
लाभ04:00 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3306:31दिन
गुरु06:3107:29दिन
मंगल07:2908:27दिन
सूर्य08:2709:25दिन
शुक्र09:2510:23दिन
बुध10:2311:22दिन
चंद्र11:2212:20दिन
शनि12:2013:18दिन
गुरु13:1814:16दिन
मंगल14:1615:14दिन
सूर्य15:1416:12दिन
शुक्र16:1217:11दिन
बुध17:1118:13रात
चंद्र18:1319:14रात
शनि19:1420:16रात
गुरु20:1621:18रात
मंगल21:1822:20रात
सूर्य22:2023:22रात
शुक्र23:2200:24रात
बुध00:2401:26रात
चंद्र01:2602:27रात
शनि02:2703:29रात
गुरु03:2904:31रात
मंगल04:3105:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अक्टू॰ 2016आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2016तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2016कार्तिक अमावस्याअमावस्या
4 नव॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0916° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।