27 अप्रैल 2025 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 27 अप्रैल 2025, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 27 अप्रैल 2025 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (01:01, 28 अप्रैल तक), नक्षत्र अश्विनी (00:38, 28 अप्रैल तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:06 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 16:24 से 18:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:06 – 18:01
रात 05:06 तक
तिथि
अमावस्या, 01:01 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
अश्विनी, 00:38 तक
भरणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अप्रैल 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 01:01, 28 अप्रैल तक
शुक्ल प्रतिपदा 21:11, 28 अप्रैल तक
नक्षत्र
अश्विनी 00:38, 28 अप्रैल तक
भरणी 21:37, 28 अप्रैल तक
योग
प्रीति 00:19, 28 अप्रैल तक
आयुष्मान 20:02, 28 अप्रैल तक
करण
चतुष्पद 14:56 तक
नाग 01:01, 28 अप्रैल तक
किंस्तुघ्न 11:05, 28 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:06
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
04:24
चंद्रास्त
17:38
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:38 – 04:22
अभिजीत मुहूर्त
11:08 – 12:00

अशुभ समय

राहुकाल
16:24 – 18:01
यमगंड
11:34 – 13:11
गुलिक काल
14:47 – 16:24

27 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:06 – 06:43टालें
चर06:43 – 08:20सामान्य
लाभ08:20 – 09:57शुभ
अमृत09:57 – 11:34शुभ
काल11:34 – 13:11टालें
शुभ13:11 – 14:47शुभ
रोग14:47 – 16:24टालें
उद्वेग16:24 – 18:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:01 – 19:24शुभ
अमृत19:24 – 20:47शुभ
चर20:47 – 22:10सामान्य
रोग22:10 – 23:33टालें
काल23:33 – 00:57टालें
लाभ00:57 – 02:20शुभ
उद्वेग02:20 – 03:43टालें
शुभ03:43 – 05:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0606:11दिन
शुक्र06:1107:16दिन
बुध07:1608:20दिन
चंद्र08:2009:25दिन
शनि09:2510:29दिन
गुरु10:2911:34दिन
मंगल11:3412:38दिन
सूर्य12:3813:43दिन
शुक्र13:4314:47दिन
बुध14:4715:52दिन
चंद्र15:5216:57दिन
शनि16:5718:01दिन
गुरु18:0118:57रात
मंगल18:5719:52रात
सूर्य19:5220:47रात
शुक्र20:4721:43रात
बुध21:4322:38रात
चंद्र22:3823:33रात
शनि23:3300:29रात
गुरु00:2901:24रात
मंगल01:2402:20रात
सूर्य02:2003:15रात
शुक्र03:1504:10रात
बुध04:1005:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2107° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।