20 जुलाई 2025 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 20 जुलाई 2025, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 जुलाई 2025 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (12:13 तक), नक्षत्र कृत्तिका (22:53 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:02 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 16:42 से 18:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:02 – 18:22
रात 05:03 तक
तिथि
दशमी, 12:13 तक
एकादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 22:53 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जुलाई 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 12:13 तक
कृष्ण एकादशी 09:39, 21 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:07, 21 जुल॰ तक
योग
गंडअशुभ 21:48 तक
वृद्धि 18:38, 21 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:13 तक
बव 22:56 तक
बालव 09:39, 21 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मेष 06:12 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:02
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
00:14
चंद्रास्त
14:08
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:37 – 04:20
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
16:42 – 18:22
यमगंड
11:42 – 13:22
गुलिक काल
15:02 – 16:42

20 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:02 – 06:42टालें
चर06:42 – 08:22सामान्य
लाभ08:22 – 10:02शुभ
अमृत10:02 – 11:42शुभ
काल11:42 – 13:22टालें
शुभ13:22 – 15:02शुभ
रोग15:02 – 16:42टालें
उद्वेग16:42 – 18:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:22 – 19:42शुभ
अमृत19:42 – 21:02शुभ
चर21:02 – 22:22सामान्य
रोग22:22 – 23:43टालें
काल23:43 – 01:03टालें
लाभ01:03 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 03:43टालें
शुभ03:43 – 05:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0206:09दिन
शुक्र06:0907:16दिन
बुध07:1608:22दिन
चंद्र08:2209:29दिन
शनि09:2910:36दिन
गुरु10:3611:42दिन
मंगल11:4212:49दिन
सूर्य12:4913:56दिन
शुक्र13:5615:02दिन
बुध15:0216:09दिन
चंद्र16:0917:16दिन
शनि17:1618:22दिन
गुरु18:2219:16रात
मंगल19:1620:09रात
सूर्य20:0921:02रात
शुक्र21:0221:56रात
बुध21:5622:49रात
चंद्र22:4923:43रात
शनि23:4300:36रात
गुरु00:3601:29रात
मंगल01:2902:23रात
सूर्य02:2303:16रात
शुक्र03:1604:10रात
बुध04:1005:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2140° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।