8 अगस्त 2025 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (14:12 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (14:28 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 10:04 से 11:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:13
रात 05:11 तक
तिथि
चतुर्दशी, 14:12 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 14:28 तक
श्रवण
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अगस्त 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 14:12 तक
पूर्णिमा 13:25, 9 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 14:23, 9 अग॰ तक
योग
प्रीति 05:38 तक
आयुष्मान 04:08, 9 अग॰ तक
सौभाग्य 02:15, 10 अग॰ तक
करण
वणिज 14:12 तक
विष्टि (भद्रा) 01:52, 9 अग॰ तक
बव 13:25, 9 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
17:44
चंद्रास्त
03:51
दिनमान
13h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:08

अशुभ समय

राहुकाल
10:04 – 11:42
यमगंड
14:57 – 16:35
गुलिक काल
06:48 – 08:26

8 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:10 – 06:48सामान्य
लाभ06:48 – 08:26शुभ
अमृत08:26 – 10:04शुभ
काल10:04 – 11:42टालें
शुभ11:42 – 13:19शुभ
रोग13:19 – 14:57टालें
उद्वेग14:57 – 16:35टालें
चर16:35 – 18:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:13 – 19:35टालें
काल19:35 – 20:57टालें
लाभ20:57 – 22:20शुभ
उद्वेग22:20 – 23:42टालें
शुभ23:42 – 01:04शुभ
अमृत01:04 – 02:26शुभ
चर02:26 – 03:49सामान्य
रोग03:49 – 05:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1006:16दिन
बुध06:1607:21दिन
चंद्र07:2108:26दिन
शनि08:2609:31दिन
गुरु09:3110:36दिन
मंगल10:3611:42दिन
सूर्य11:4212:47दिन
शुक्र12:4713:52दिन
बुध13:5214:57दिन
चंद्र14:5716:02दिन
शनि16:0217:08दिन
गुरु17:0818:13दिन
मंगल18:1319:08रात
सूर्य19:0820:02रात
शुक्र20:0220:57रात
बुध20:5721:52रात
चंद्र21:5222:47रात
शनि22:4723:42रात
गुरु23:4200:37रात
मंगल00:3701:31रात
सूर्य01:3102:26रात
शुक्र02:2603:21रात
बुध03:2104:16रात
चंद्र04:1605:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2147° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।