20 फ़रवरी 2026 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (14:38 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (20:07 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 10:24 से 11:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 17:35
रात 06:04 तक
तिथि
तृतीया, 14:38 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 20:07 तक
रेवती
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 14:38 तक
शुक्ल चतुर्थी 13:01, 21 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 19:07, 21 फ़र॰ तक
योग
साध्य 18:23 तक
शुभ 15:51, 21 फ़र॰ तक
करण
गर 14:38 तक
वणिज 01:52, 21 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:01, 21 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
07:41
चंद्रास्त
20:21
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
10:24 – 11:50
यमगंड
14:43 – 16:09
गुलिक काल
07:31 – 08:57

20 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:05 – 07:31सामान्य
लाभ07:31 – 08:57शुभ
अमृत08:57 – 10:24शुभ
काल10:24 – 11:50टालें
शुभ11:50 – 13:16शुभ
रोग13:16 – 14:43टालें
उद्वेग14:43 – 16:09टालें
चर16:09 – 17:35सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:35 – 19:09टालें
काल19:09 – 20:42टालें
लाभ20:42 – 22:16शुभ
उद्वेग22:16 – 23:50टालें
शुभ23:50 – 01:23शुभ
अमृत01:23 – 02:57शुभ
चर02:57 – 04:30सामान्य
रोग04:30 – 06:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0507:02दिन
बुध07:0208:00दिन
चंद्र08:0008:57दिन
शनि08:5709:55दिन
गुरु09:5510:52दिन
मंगल10:5211:50दिन
सूर्य11:5012:47दिन
शुक्र12:4713:45दिन
बुध13:4514:43दिन
चंद्र14:4315:40दिन
शनि15:4016:38दिन
गुरु16:3817:35दिन
मंगल17:3518:38रात
सूर्य18:3819:40रात
शुक्र19:4020:42रात
बुध20:4221:45रात
चंद्र21:4522:47रात
शनि22:4723:50रात
गुरु23:5000:52रात
मंगल00:5201:54रात
सूर्य01:5402:57रात
शुक्र02:5703:59रात
बुध03:5905:01रात
चंद्र05:0106:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2222° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।