9 जुलाई 2026 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 9 जुलाई 2026, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (10:38 तक), नक्षत्र अश्विनी (14:56 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 04:58 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 13:22 से 15:03 तक है।

दिन और रात
दिन 04:58 – 18:25
रात 04:58 तक
तिथि
नवमी, 10:38 तक
दशमी
नक्षत्र
अश्विनी, 14:56 तक
भरणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 जुलाई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 10:38 तक
कृष्ण दशमी 08:16, 10 जुल॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:15, 10 जुल॰ तक
योग
सुकर्मा 10:12 तक
धृति 07:14, 10 जुल॰ तक
करण
गर 10:38 तक
वणिज 21:31 तक
विष्टि (भद्रा) 08:16, 10 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:58
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:08
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:33 – 04:16
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 12:08

अशुभ समय

राहुकाल
13:22 – 15:03
यमगंड
04:58 – 06:39
गुलिक काल
08:20 – 10:00

9 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ04:58 – 06:39शुभ
रोग06:39 – 08:20टालें
उद्वेग08:20 – 10:00टालें
चर10:00 – 11:41सामान्य
लाभ11:41 – 13:22शुभ
अमृत13:22 – 15:03शुभ
काल15:03 – 16:44टालें
शुभ16:44 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:25 – 19:44शुभ
चर19:44 – 21:03सामान्य
रोग21:03 – 22:22टालें
काल22:22 – 23:41टालें
लाभ23:41 – 01:01शुभ
उद्वेग01:01 – 02:20टालें
शुभ02:20 – 03:39शुभ
अमृत03:39 – 04:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु04:5806:05दिन
मंगल06:0507:12दिन
सूर्य07:1208:20दिन
शुक्र08:2009:27दिन
बुध09:2710:34दिन
चंद्र10:3411:41दिन
शनि11:4112:48दिन
गुरु12:4813:56दिन
मंगल13:5615:03दिन
सूर्य15:0316:10दिन
शुक्र16:1017:17दिन
बुध17:1718:25दिन
चंद्र18:2519:17रात
शनि19:1720:10रात
गुरु20:1021:03रात
मंगल21:0321:56रात
सूर्य21:5622:49रात
शुक्र22:4923:41रात
बुध23:4100:34रात
चंद्र00:3401:27रात
शनि01:2702:20रात
गुरु02:2003:13रात
मंगल03:1304:05रात
सूर्य04:0504:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2275° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।