13 फ़रवरी 2027 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 13 फ़रवरी 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 13 फ़रवरी 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (02:07, 14 फ़र॰ तक), नक्षत्र भरणी (05:37, 14 फ़र॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 09:00 से 10:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 17:31
रात 06:09 तक
तिथि
सप्तमी, 02:07 तक
अष्टमी
नक्षत्र
भरणी, 05:37 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 02:07, 14 फ़र॰ तक
शुक्ल अष्टमी 00:41, 15 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 05:37, 14 फ़र॰ तक
कृत्तिका 04:46, 15 फ़र॰ तक
योग
शुक्ल 17:18 तक
ब्रह्म 15:08, 14 फ़र॰ तक
करण
गर 14:37 तक
वणिज 02:07, 14 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:28, 14 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
09:53
चंद्रास्त
23:34
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
09:00 – 10:25
यमगंड
13:16 – 14:41
गुलिक काल
06:09 – 07:35

13 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:09 – 07:35टालें
शुभ07:35 – 09:00शुभ
रोग09:00 – 10:25टालें
उद्वेग10:25 – 11:50टालें
चर11:50 – 13:16सामान्य
लाभ13:16 – 14:41शुभ
अमृत14:41 – 16:06शुभ
काल16:06 – 17:31टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:31 – 19:06शुभ
उद्वेग19:06 – 20:41टालें
शुभ20:41 – 22:15शुभ
अमृत22:15 – 23:50शुभ
चर23:50 – 01:25सामान्य
रोग01:25 – 02:59टालें
काल02:59 – 04:34टालें
लाभ04:34 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0907:06दिन
गुरु07:0608:03दिन
मंगल08:0309:00दिन
सूर्य09:0009:57दिन
शुक्र09:5710:54दिन
बुध10:5411:50दिन
चंद्र11:5012:47दिन
शनि12:4713:44दिन
गुरु13:4414:41दिन
मंगल14:4115:38दिन
सूर्य15:3816:34दिन
शुक्र16:3417:31दिन
बुध17:3118:34रात
चंद्र18:3419:38रात
शनि19:3820:41रात
गुरु20:4121:44रात
मंगल21:4422:47रात
सूर्य22:4723:50रात
शुक्र23:5000:53रात
बुध00:5301:56रात
चंद्र01:5602:59रात
शनि02:5904:03रात
गुरु04:0305:06रात
मंगल05:0606:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2359° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।