12 जून 2027 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 12 जून 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 12 जून 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (02:44, 13 जून तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (16:59 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 04:51 पर और सूर्यास्त 18:21 पर है। राहुकाल 08:13 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 04:51 – 18:21
रात 04:51 तक
तिथि
नवमी, 02:44 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 16:59 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जून 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:44, 13 जून तक
शुक्ल दशमी 02:12, 14 जून तक
नक्षत्र
हस्त 17:00, 13 जून तक
योग
सिद्धि 10:48 तक
व्यतीपातअशुभ 09:05, 13 जून तक
करण
बालव 15:11 तक
कौलव 02:44, 13 जून तक
तैतिल 14:25, 13 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:51
सूर्यास्त
18:21
चंद्रोदय
12:22
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:27 – 04:09
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
08:13 – 09:55
यमगंड
13:17 – 14:58
गुलिक काल
04:51 – 06:32

12 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल04:51 – 06:32टालें
शुभ06:32 – 08:13शुभ
रोग08:13 – 09:55टालें
उद्वेग09:55 – 11:36टालें
चर11:36 – 13:17सामान्य
लाभ13:17 – 14:58शुभ
अमृत14:58 – 16:40शुभ
काल16:40 – 18:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:21 – 19:40शुभ
उद्वेग19:40 – 20:58टालें
शुभ20:58 – 22:17शुभ
अमृत22:17 – 23:36शुभ
चर23:36 – 00:55सामान्य
रोग00:55 – 02:13टालें
काल02:13 – 03:32टालें
लाभ03:32 – 04:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि04:5105:58दिन
गुरु05:5807:06दिन
मंगल07:0608:13दिन
सूर्य08:1309:21दिन
शुक्र09:2110:28दिन
बुध10:2811:36दिन
चंद्र11:3612:43दिन
शनि12:4313:51दिन
गुरु13:5114:58दिन
मंगल14:5816:06दिन
सूर्य16:0617:13दिन
शुक्र17:1318:21दिन
बुध18:2119:13रात
चंद्र19:1320:06रात
शनि20:0620:58रात
गुरु20:5821:51रात
मंगल21:5122:43रात
सूर्य22:4323:36रात
शुक्र23:3600:28रात
बुध00:2801:21रात
चंद्र01:2102:13रात
शनि02:1303:06रात
गुरु03:0603:58रात
मंगल03:5804:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2404° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।