10 जून 2029 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 10 जून 2029, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 10 जून 2029 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:48 तक), नक्षत्र कृत्तिका (00:05, 11 जून तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 04:51 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 16:39 से 18:20 तक है।

दिन और रात
दिन 04:51 – 18:20
रात 04:51 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 00:05 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जून 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:48 तक
कृष्ण चतुर्दशी 08:17, 11 जून तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:05, 11 जून तक
रोहिणी 01:54, 12 जून तक
योग
सुकर्मा 19:27 तक
धृति 19:30, 11 जून तक
करण
वणिज 06:48 तक
विष्टि (भद्रा) 19:36 तक
शकुनि 08:17, 11 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:51
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
03:05
चंद्रास्त
16:51
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:27 – 04:09
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
16:39 – 18:20
यमगंड
11:36 – 13:17
गुलिक काल
14:58 – 16:39

10 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग04:51 – 06:32टालें
चर06:32 – 08:13सामान्य
लाभ08:13 – 09:54शुभ
अमृत09:54 – 11:36शुभ
काल11:36 – 13:17टालें
शुभ13:17 – 14:58शुभ
रोग14:58 – 16:39टालें
उद्वेग16:39 – 18:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:20 – 19:39शुभ
अमृत19:39 – 20:58शुभ
चर20:58 – 22:17सामान्य
रोग22:17 – 23:36टालें
काल23:36 – 00:54टालें
लाभ00:54 – 02:13शुभ
उद्वेग02:13 – 03:32टालें
शुभ03:32 – 04:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य04:5105:58दिन
शुक्र05:5807:06दिन
बुध07:0608:13दिन
चंद्र08:1309:21दिन
शनि09:2110:28दिन
गुरु10:2811:36दिन
मंगल11:3612:43दिन
सूर्य12:4313:50दिन
शुक्र13:5014:58दिन
बुध14:5816:05दिन
चंद्र16:0517:13दिन
शनि17:1318:20दिन
गुरु18:2019:13रात
मंगल19:1320:05रात
सूर्य20:0520:58रात
शुक्र20:5821:50रात
बुध21:5022:43रात
चंद्र22:4323:36रात
शनि23:3600:28रात
गुरु00:2801:21रात
मंगल01:2102:13रात
सूर्य02:1303:06रात
शुक्र03:0603:58रात
बुध03:5804:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2683° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।