12 अक्टूबर 2032 को कोलकाता का पंचांग

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2032, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2032 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (20:25 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (12:04 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 17:13
रात 05:32 तक
तिथि
अष्टमी, 20:25 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 12:04 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2032 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 20:25 तक
शुक्ल नवमी 18:19, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 10:52, 13 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 09:06 तक
सुकर्मा 06:27, 13 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:17 तक
बव 20:25 तक
बालव 07:25, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 17:49 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
12:07
चंद्रास्त
23:36
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2089
शक संवत
1954, परिधावी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:45
यमगंड
08:27 – 09:55
गुलिक काल
11:22 – 12:50

12 अक्टूबर 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:31 – 06:59टालें
उद्वेग06:59 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:55सामान्य
लाभ09:55 – 11:22शुभ
अमृत11:22 – 12:50शुभ
काल12:50 – 14:18टालें
शुभ14:18 – 15:45शुभ
रोग15:45 – 17:13टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:13 – 18:45टालें
लाभ18:45 – 20:18शुभ
उद्वेग20:18 – 21:50टालें
शुभ21:50 – 23:22शुभ
अमृत23:22 – 00:55शुभ
चर00:55 – 02:27सामान्य
रोग02:27 – 03:59टालें
काल03:59 – 05:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3106:30दिन
सूर्य06:3007:28दिन
शुक्र07:2808:27दिन
बुध08:2709:25दिन
चंद्र09:2510:24दिन
शनि10:2411:22दिन
गुरु11:2212:21दिन
मंगल12:2113:19दिन
सूर्य13:1914:18दिन
शुक्र14:1815:16दिन
बुध15:1616:15दिन
चंद्र16:1517:13दिन
शनि17:1318:15रात
गुरु18:1519:16रात
मंगल19:1620:18रात
सूर्य20:1821:19रात
शुक्र21:1922:21रात
बुध22:2123:22रात
चंद्र23:2200:24रात
शनि00:2401:26रात
गुरु01:2602:27रात
मंगल02:2703:29रात
सूर्य03:2904:30रात
शुक्र04:3005:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अक्टू॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2032तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2032आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
22 अक्टू॰ 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 अक्टू॰ 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 अक्टू॰ 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 नव॰ 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 नव॰ 2032कार्तिक अमावस्याअमावस्या
7 नव॰ 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3150° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।