22 सितंबर 2060 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 22 सितंबर 2060, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 सितंबर 2060 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (18:04 तक), नक्षत्र मघा (21:29 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 11:28 से 12:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 17:32
रात 05:25 तक
तिथि
त्रयोदशी, 18:04 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मघा, 21:29 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2060 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 18:04 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:31, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:29 तक
पूर्वा फाल्गुनी 23:34, 23 सित॰ तक
योग
साध्य 05:13, 23 सित॰ तक
शुभ 05:28, 24 सित॰ तक
करण
गर 05:30 तक
वणिज 18:04 तक
विष्टि (भद्रा) 06:44, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
03:12
चंद्रास्त
16:25
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2117
शक संवत
1982, विक्रम संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:28 – 12:59
यमगंड
06:56 – 08:27
गुलिक काल
09:58 – 11:28

22 सितंबर 2060 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:25 – 06:56शुभ
अमृत06:56 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:58टालें
शुभ09:58 – 11:28शुभ
रोग11:28 – 12:59टालें
उद्वेग12:59 – 14:30टालें
चर14:30 – 16:01सामान्य
लाभ16:01 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:32 – 19:01टालें
शुभ19:01 – 20:30शुभ
अमृत20:30 – 21:59शुभ
चर21:59 – 23:29सामान्य
रोग23:29 – 00:58टालें
काल00:58 – 02:27टालें
लाभ02:27 – 03:56शुभ
उद्वेग03:56 – 05:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2506:26दिन
चंद्र06:2607:26दिन
शनि07:2608:27दिन
गुरु08:2709:27दिन
मंगल09:2710:28दिन
सूर्य10:2811:28दिन
शुक्र11:2812:29दिन
बुध12:2913:30दिन
चंद्र13:3014:30दिन
शनि14:3015:31दिन
गुरु15:3116:31दिन
मंगल16:3117:32दिन
सूर्य17:3218:31रात
शुक्र18:3119:31रात
बुध19:3120:30रात
चंद्र20:3021:30रात
शनि21:3022:29रात
गुरु22:2923:29रात
मंगल23:2900:28रात
सूर्य00:2801:27रात
शुक्र01:2702:27रात
बुध02:2703:26रात
चंद्र03:2604:26रात
शनि04:2605:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2060प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 सित॰ 2060आश्विन अमावस्याअमावस्या
28 सित॰ 2060विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 अक्टू॰ 2060शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2060प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अक्टू॰ 2060आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
13 अक्टू॰ 2060संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अक्टू॰ 2060कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2060तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2060कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7054° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।