29 सितंबर 2066 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 29 सितंबर 2066, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 सितंबर 2066 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (00:30, 30 सित॰ तक), नक्षत्र श्रवण (23:04 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 11:26 से 12:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 17:25
रात 05:27 तक
तिथि
एकादशी, 00:30 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 23:04 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2066 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 00:30, 30 सित॰ तक
शुक्ल द्वादशी 22:29, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 23:04 तक
धनिष्ठा 21:48, 30 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 19:43 तक
धृति 16:57, 30 सित॰ तक
करण
वणिज 13:32 तक
विष्टि (भद्रा) 00:30, 30 सित॰ तक
बव 11:29, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
14:25
चंद्रास्त
01:03
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2123
शक संवत
1988, व्यय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:02 – 11:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:26 – 12:56
यमगंड
06:57 – 08:27
गुलिक काल
09:56 – 11:26

29 सितंबर 2066 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:27 – 06:57शुभ
अमृत06:57 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:56टालें
शुभ09:56 – 11:26शुभ
रोग11:26 – 12:56टालें
उद्वेग12:56 – 14:26टालें
चर14:26 – 15:56सामान्य
लाभ15:56 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 18:56टालें
शुभ18:56 – 20:26शुभ
अमृत20:26 – 21:56शुभ
चर21:56 – 23:26सामान्य
रोग23:26 – 00:57टालें
काल00:57 – 02:27टालें
लाभ02:27 – 03:57शुभ
उद्वेग03:57 – 05:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2706:27दिन
चंद्र06:2707:27दिन
शनि07:2708:27दिन
गुरु08:2709:26दिन
मंगल09:2610:26दिन
सूर्य10:2611:26दिन
शुक्र11:2612:26दिन
बुध12:2613:26दिन
चंद्र13:2614:26दिन
शनि14:2615:26दिन
गुरु15:2616:26दिन
मंगल16:2617:25दिन
सूर्य17:2518:26रात
शुक्र18:2619:26रात
बुध19:2620:26रात
चंद्र20:2621:26रात
शनि21:2622:26रात
गुरु22:2623:26रात
मंगल23:2600:26रात
सूर्य00:2601:27रात
शुक्र01:2702:27रात
बुध02:2703:27रात
चंद्र03:2704:27रात
शनि04:2705:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 सित॰ 2066शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2066प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2066आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2066संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2066कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अक्टू॰ 2066कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2066प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 अक्टू॰ 2066तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2066कार्तिक अमावस्याअमावस्या
22 अक्टू॰ 2066विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7895° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।