9 अक्टूबर 2072 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 9 अक्टूबर 2072, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 अक्टूबर 2072 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (09:36 तक), नक्षत्र मघा (05:31 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 15:47 से 17:16 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:16
रात 05:31 तक
तिथि
द्वादशी, 09:36 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 03:00 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2072 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 09:36 तक
कृष्ण त्रयोदशी 06:17, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 05:31 तक
पूर्वा फाल्गुनी 03:00, 10 अक्टू॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 00:21, 11 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 08:01 तक
शुक्ल 04:09, 10 अक्टू॰ तक
ब्रह्म 00:10, 11 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 09:36 तक
गर 19:58 तक
वणिज 06:17, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
02:41
चंद्रास्त
15:34
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2129
शक संवत
1994, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
15:47 – 17:16
यमगंड
11:23 – 12:51
गुलिक काल
14:19 – 15:47

9 अक्टूबर 2072 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:30 – 06:59टालें
चर06:59 – 08:27सामान्य
लाभ08:27 – 09:55शुभ
अमृत09:55 – 11:23शुभ
काल11:23 – 12:51टालें
शुभ12:51 – 14:19शुभ
रोग14:19 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:16टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:16 – 18:47शुभ
अमृत18:47 – 20:19शुभ
चर20:19 – 21:51सामान्य
रोग21:51 – 23:23टालें
काल23:23 – 00:55टालें
लाभ00:55 – 02:27शुभ
उद्वेग02:27 – 03:59टालें
शुभ03:59 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3006:29दिन
शुक्र06:2907:28दिन
बुध07:2808:27दिन
चंद्र08:2709:25दिन
शनि09:2510:24दिन
गुरु10:2411:23दिन
मंगल11:2312:22दिन
सूर्य12:2213:20दिन
शुक्र13:2014:19दिन
बुध14:1915:18दिन
चंद्र15:1816:17दिन
शनि16:1717:16दिन
गुरु17:1618:17रात
मंगल18:1719:18रात
सूर्य19:1820:19रात
शुक्र20:1921:21रात
बुध21:2122:22रात
चंद्र22:2223:23रात
शनि23:2300:24रात
गुरु00:2401:26रात
मंगल01:2602:27रात
सूर्य02:2703:28रात
शुक्र03:2804:30रात
बुध04:3005:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2072प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 अक्टू॰ 2072आश्विन अमावस्याअमावस्या
15 अक्टू॰ 2072विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2072तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2072शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2072प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2072आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
31 अक्टू॰ 2072संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 नव॰ 2072कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 नव॰ 2072कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8737° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।