20 सितंबर 2098 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 20 सितंबर 2098, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 20 सितंबर 2098 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (21:44 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (22:12 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 17:34
रात 05:25 तक
तिथि
दशमी, 21:44 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 22:12 तक
पुष्य
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2098 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 21:44 तक
कृष्ण एकादशी 18:50, 21 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 20:04, 21 सित॰ तक
योग
वरीयान 12:15 तक
परिघअशुभ 08:54, 21 सित॰ तक
करण
वणिज 11:03 तक
विष्टि (भद्रा) 21:44 तक
बव 08:19, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 16:41 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
14:10
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2155
शक संवत
2020, कालयुक्त संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:58
यमगंड
13:00 – 14:32
गुलिक काल
05:24 – 06:56

20 सितंबर 2098 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:24 – 06:56टालें
शुभ06:56 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:58टालें
उद्वेग09:58 – 11:29टालें
चर11:29 – 13:00सामान्य
लाभ13:00 – 14:32शुभ
अमृत14:32 – 16:03शुभ
काल16:03 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:34 – 19:03शुभ
उद्वेग19:03 – 20:32टालें
शुभ20:32 – 22:01शुभ
अमृत22:01 – 23:29शुभ
चर23:29 – 00:58सामान्य
रोग00:58 – 02:27टालें
काल02:27 – 03:56टालें
लाभ03:56 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2406:25दिन
गुरु06:2507:26दिन
मंगल07:2608:27दिन
सूर्य08:2709:28दिन
शुक्र09:2810:28दिन
बुध10:2811:29दिन
चंद्र11:2912:30दिन
शनि12:3013:31दिन
गुरु13:3114:32दिन
मंगल14:3215:33दिन
सूर्य15:3316:33दिन
शुक्र16:3317:34दिन
बुध17:3418:33रात
चंद्र18:3319:33रात
शनि19:3320:32रात
गुरु20:3221:31रात
मंगल21:3122:30रात
सूर्य22:3023:29रात
शुक्र23:2900:29रात
बुध00:2901:28रात
चंद्र01:2802:27रात
शनि02:2703:26रात
गुरु03:2604:25रात
मंगल04:2505:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 सित॰ 2098कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 सित॰ 2098प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 सित॰ 2098आश्विन अमावस्याअमावस्या
28 सित॰ 2098विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अक्टू॰ 2098शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2098प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2098आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
14 अक्टू॰ 2098संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2098कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 अक्टू॰ 2098तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.2363° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।