20 फ़रवरी 2029 को कृष्णनगर का पंचांग

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2029, कृष्णनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2029 को कृष्णनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (07:50, 21 फ़र॰ तक), नक्षत्र भरणी (20:20 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 14:42 से 16:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 17:34
रात 06:04 तक
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
भरणी, 20:20 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 07:50, 21 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:20 तक
कृत्तिका 22:35, 21 फ़र॰ तक
योग
ब्रह्म 17:55 तक
इंद्र 18:13, 21 फ़र॰ तक
करण
गर 18:52 तक
वणिज 07:50, 21 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 02:57, 21 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
09:44
चंद्रास्त
23:28
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
14:42 – 16:08
यमगंड
08:57 – 10:23
गुलिक काल
11:49 – 13:16

20 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:05 – 07:31टालें
उद्वेग07:31 – 08:57टालें
चर08:57 – 10:23सामान्य
लाभ10:23 – 11:49शुभ
अमृत11:49 – 13:16शुभ
काल13:16 – 14:42टालें
शुभ14:42 – 16:08शुभ
रोग16:08 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:34 – 19:08टालें
लाभ19:08 – 20:42शुभ
उद्वेग20:42 – 22:15टालें
शुभ22:15 – 23:49शुभ
अमृत23:49 – 01:23शुभ
चर01:23 – 02:56सामान्य
रोग02:56 – 04:30टालें
काल04:30 – 06:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0507:02दिन
सूर्य07:0208:00दिन
शुक्र08:0008:57दिन
बुध08:5709:54दिन
चंद्र09:5410:52दिन
शनि10:5211:49दिन
गुरु11:4912:47दिन
मंगल12:4713:44दिन
सूर्य13:4414:42दिन
शुक्र14:4215:39दिन
बुध15:3916:37दिन
चंद्र16:3717:34दिन
शनि17:3418:37रात
गुरु18:3719:39रात
मंगल19:3920:42रात
सूर्य20:4221:44रात
शुक्र21:4422:47रात
बुध22:4723:49रात
चंद्र23:4900:51रात
शनि00:5101:54रात
गुरु01:5402:56रात
मंगल02:5603:59रात
सूर्य03:5905:01रात
शुक्र05:0106:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कृष्णनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2641° (लाहिड़ी)। समय कृष्णनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।