16 अक्टूबर 2026 को लेस्टर का पंचांग

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026, लेस्टर, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लेस्टर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (01:24, 17 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (05:17, 17 अक्टू॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:31 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 11:30 से 12:49 तक है।

दिन और रात
दिन 07:31 – 18:07
रात 07:33 तक
तिथि
षष्ठी, 01:24 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मूल, 05:17 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 01:24, 17 अक्टू॰ तक
शुक्ल सप्तमी 03:58, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 05:17, 17 अक्टू॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 08:19, 18 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 17:35 तक
अतिगंडअशुभ 18:32, 17 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:08 तक
तैतिल 01:24, 17 अक्टू॰ तक
गर 14:42, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:31
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
14:20
चंद्रास्त
20:44
दिनमान
10h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:44 – 06:38
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
11:30 – 12:49
यमगंड
15:28 – 16:47
गुलिक काल
08:51 – 10:10

16 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:31 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:10शुभ
अमृत10:10 – 11:30शुभ
काल11:30 – 12:49टालें
शुभ12:49 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 16:47टालें
चर16:47 – 18:07सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:07 – 19:48टालें
काल19:48 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:50टालें
शुभ00:50 – 02:31शुभ
अमृत02:31 – 04:12शुभ
चर04:12 – 05:52सामान्य
रोग05:52 – 07:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3108:24दिन
बुध08:2409:17दिन
चंद्र09:1710:10दिन
शनि10:1011:03दिन
गुरु11:0311:56दिन
मंगल11:5612:49दिन
सूर्य12:4913:42दिन
शुक्र13:4214:35दिन
बुध14:3515:28दिन
चंद्र15:2816:21दिन
शनि16:2117:14दिन
गुरु17:1418:07दिन
मंगल18:0719:14रात
सूर्य19:1420:21रात
शुक्र20:2121:28रात
बुध21:2822:36रात
चंद्र22:3623:43रात
शनि23:4300:50रात
गुरु00:5001:57रात
मंगल01:5703:04रात
सूर्य03:0404:12रात
शुक्र04:1205:19रात
बुध05:1906:26रात
चंद्र06:2607:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लेस्टर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2313° (लाहिड़ी)। समय लेस्टर (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।