6 अगस्त 2025 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 6 अगस्त 2025, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 6 अगस्त 2025 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (09:38 तक), नक्षत्र मूल (08:30 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 20:39 पर है। राहुकाल 13:05 से 14:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 20:39
रात 05:33 तक
तिथि
द्वादशी, 09:38 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मूल, 08:30 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अगस्त 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 09:38 तक
शुक्ल त्रयोदशी 09:58, 7 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 08:30 तक
पूर्वाषाढ़ा 09:31, 7 अग॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 02:12, 7 अग॰ तक
प्रीति 01:08, 8 अग॰ तक
करण
बालव 09:38 तक
कौलव 21:53 तक
तैतिल 09:58, 7 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
20:39
चंद्रोदय
19:43
चंद्रास्त
01:26
दिनमान
15h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:36 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:05 – 14:59
यमगंड
07:25 – 09:19
गुलिक काल
11:12 – 13:05

6 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:32 – 07:25शुभ
अमृत07:25 – 09:19शुभ
काल09:19 – 11:12टालें
शुभ11:12 – 13:05शुभ
रोग13:05 – 14:59टालें
उद्वेग14:59 – 16:52टालें
चर16:52 – 18:46सामान्य
लाभ18:46 – 20:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:39 – 21:46टालें
शुभ21:46 – 22:53शुभ
अमृत22:53 – 23:59शुभ
चर23:59 – 01:06सामान्य
रोग01:06 – 02:13टालें
काल02:13 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:26शुभ
उद्वेग04:26 – 05:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3206:47दिन
चंद्र06:4708:03दिन
शनि08:0309:19दिन
गुरु09:1910:34दिन
मंगल10:3411:50दिन
सूर्य11:5013:05दिन
शुक्र13:0514:21दिन
बुध14:2115:37दिन
चंद्र15:3716:52दिन
शनि16:5218:08दिन
गुरु18:0819:23दिन
मंगल19:2320:39दिन
सूर्य20:3921:24रात
शुक्र21:2422:08रात
बुध22:0822:53रात
चंद्र22:5323:37रात
शनि23:3700:22रात
गुरु00:2201:06रात
मंगल01:0601:51रात
सूर्य01:5102:35रात
शुक्र02:3503:20रात
बुध03:2004:04रात
चंद्र04:0404:49रात
शनि04:4905:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
12 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2146° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।